बिजनौर। बढ़ते तापमान के साथ शरीर में पानी की कमी और निम्न रक्तचाप की समस्याएं गंभीर हो रही हैं। दोपहिया वाहन चलाने वाले लोग इन स्वास्थ्य जोखिमों का अधिक सामना कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में ऐसे मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।
पिछले एक सप्ताह से जिले में भीषण गर्मी हो रही है। दिन का अधिकतम तापमान जहां 40 डिग्री के आसपास चल रहा है। वहीं लू के थपेड़ों से भी जनमानस प्रभावित है। ऐसे में शरीर में पानी की कमी की समस्या भी बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 10 मरीज इस समस्या से पीड़ित पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी में शरीर से अत्यधिक पसीने के रूप में पानी और आवश्यक खनिज बाहर निकल जाते हैं। यह स्थिति शरीर में पानी की कमी को जन्म देती है। जब शरीर में पानी का स्तर बहुत कम हो जाता है, तो रक्त की मात्रा भी घट जाती है। इसके परिणामस्वरूप रक्तचाप सामान्य से नीचे चला जाता है।
अत्यधिक पसीना आना मुख्य कारण
अत्यधिक पसीना और पानी की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। पानी और खनिजों की कमी से व्यक्ति को अत्यधिक थकान महसूस होती है। इससे चक्कर आने की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। शरीर में पानी की कमी हल्के से लेकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। डायबिटीज या उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह विशेष खतरनाक है।
दोपहिया वाहन चालकों पर विशेष खतरा
दोपहिया वाहन चालक दिन के समय सीधे सूर्य की तपिश और गर्म हवाओं के संपर्क में आते हैं। इससे उनके शरीर से पानी और सोडियम का तेजी से क्षरण होता है। लंबे समय तक यात्रा या तेज धूप में रहने से उनमें शरीर में पानी की कमी और निम्न रक्तचाप का खतरा बढ़ जाता है। कई मरीज जो मेडिकल अस्पताल पहुंच रहे हैं, उनमें दोपहिया वाहन चलाने वाले प्रमुख हैं। उन्हें चक्कर आने, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी जैसी शिकायतें हो रही हैं।
बचाव के उपाय और चिकित्सक की सलाह: डॉ. राजेश
मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. राजेश डाबरे ने बताया कि गर्मी में शरीर को हाइड्रेटेड रखना सबसे महत्वपूर्ण है। पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी जैसे पेय पदार्थों का सेवन करें। भारी, तले-भुने और मसालेदार भोजन से परहेज करना चाहिए। नियमित अंतराल पर पानी पिएं और ओआरएस या इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त पेय लें। धूप से बचाव करें और दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचें।