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गंगा यात्रा से बदल गई तटीय गांवों की सूरत

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गंगा यात्रा से बदल रही तटीय गांवों की सूरत
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बिजनौर। जिले के गंगा किनारे के गांवों की सूरत बदल गई है। प्राथमिक विद्यालय पब्लिक स्कूल बन रहे हैं। ग्रामीण की अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई घोषणाओं के क्रियान्वयन पर निगाह है। साथ ही ग्रामीणों का यह भी कहना है कि गांवों की खूबसूरती बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकार ही नहीं उनकी भी है।
जिले में गंगा किनारे 22 ग्राम पंचायत हैं। इनमें मौहम्मदपुर देवमल ब्लाक में 12, हल्दौर में पांच, जलीलपुर में तीन और नजीबाबाद ब्लॉक में दो ग्राम पंचायत है। इन ग्राम पंचायत में 90 राजस्व ग्राम आते हैं। गंगा यात्रा को देखते हुए जमकर विकास कार्य हुए हैं। लंबित काम पूरे हो गए हैं। विकास कार्य पंचायती राज विभाग ने कराए हैं। कूड़ा प्रबंधन के लिए खाद के गड्ढे बना दिए गए हैं। जगह-जगह कूड़ा डालने के लिए डस्टबिन रखे गए हैं। पंचायतराज विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर स्वच्छता के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। गांवों के प्राथमिक विद्यालय को रंग रोगन करके पूरी तरह बदल दिया गया है। दीवारों पर बच्चों को आकर्षित करने वाली चित्रकारी है। गंगा की निर्मलता को प्रेरित करते नारे भी लिखे हैं। सभी 90 राजस्व गांव ओडीएफ हैं। गांवों में 155 नए शौचालय बनाए गए हैं। गंगा चबूतरे बने हैं। पॉलिथीन दूर-दूर तक दिखाई नहीं पड़ती है।
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डीपीआरओ सतीश कुमार बताते हैं कि गांवों को स्वच्छ बनाने में ग्रामीणों का भी सहयोग मिल रहा है। ग्रामीण दिग्विजय सिंह बताते हैं कि अब तक किसी ने गंगा किनारे के गांवों की ओर ध्यान दिया था। विकास के नाम पर ये उपेक्षित थे। गंगा यात्रा से इन गांवों के दिन बहुरे हैं। 27 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा किनारे के गांवों के विकास के लिए कई घोषणाएं की हैं। ग्रामीणों को भरोसा है कि ये घोषणाएं ,घोषणाएं न रहकर संजीदगी से लागू होंगी। जहानाबाद के बुजुर्ग कुड़वा कहते हैं कि गंगा यात्रा के नाम पर काम तो बहुत हो गए हैं, लेकिन गांव की साफ सफाई रखना आदि गांव वालों का काम है। गांव के युवाओं को पढ़ाई के साथ सामाजिक कामों में भी दिलचस्पी लेनी चाहिए। पूरी तरह सरकार के भरोसे नहीं रहना चाहिए। सरकार ने रास्ता दिखा दिया है, अब इस पर कैसे चलना है यह गांव वालों को तय करना है। सलेमपुर मथना की रफीकन कहती है कि उसके घर के पास लोगों ने कूड़ी डाल रखी थी। मै परेशान थी। अब सफाई होने से खुश हूं। अब मै यहां कूड़ा डलने नहीं दूंगी, चाहे कुछ भी हो जाए।
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