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स्वाहेड़ी ने समझा बेटियों का मान

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स्वाहेड़ी ने समझा बेटियों का मान
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बिजनौर। अगर बेटा घर का चिराग है तो बेटी घर की लक्ष्मी। यह बात अगर कोई न मानता हो तो वह गांव स्वाहेड़ी से सीख ले सकता है। देश में करीब पांच साल से बेटी बचाने के साथ उसकी पढ़ाई को प्रेरित करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन गांव स्वाहेड़ी में करीब डेढ़ दशक से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चलाया जा रहा है। गांव में कन्या भ्रूण हत्या की कोई बात नहीं करता है।
कभी गांव स्वाहेड़ी आपसी रंजिश के लिए जाना जाता था, लेकिन इसके बाद गांव में आर्य समाज का प्रभाव बढ़ा। सभी परिवारों के सदस्य आर्य समाज से जुड़े। सभी त्योहारों पर गांवों में हवन होने लगे। आर्य समाज से जुड़े लोगों ने कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान चलाया। गांव में करीब डेढ़ दशक पहले बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान शुरू किया गया। गांवों में जो भी हवन होता तो उसमें बेटे के बजाए बेटी को माता पिता के साथ यजमान बनाया जाने लगा। दूसरे गांव वाले जब फरवरी में होने वाले बड़े हवन में शामिल होने आते तो वह भी गांव स्वाहेड़ी की इस परंपरा से दूर नहीं रह पाए।
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आज गांव से बाहर भी कई परिवारों में यज्ञ में बेटी को यजमान बनाया जाता है। गांव में बेटियों की शिक्षा पर भी जोर दिया गया। शहर से करीब दस किलोमीटर दूर बसे इस गांव की बेटियां स्कूल बस, रोडवेज व निजी वाहनों से पढ़ने के लिए बिजनौर आती हैं। किसी की पढ़ाई पर कोई रोक नहीं है। गांव की हनी चौधरी प्रोफेसर बन चुकी है। गांव की आकांक्षा चौधरी देश की दूसरे रैंक की पैराशूटर है, तो स्वाति चौधरी भी शूटिंग में नाम कमा रही है। गांव की लगभग हर बेटी साक्षर है। इस गांव की बेटियों से निरक्षरता का दंश काफी पहले खत्म किया जा चुका है। गांव की युवतियां प्राइवेट जॉब करने के लिए बिजनौर आती हैं। आर्य समाज के संरक्षक मनोज आर्य के अनुसार गांव वाले बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से काफी पहले से जुड़े हैं। बेटी तो समाज का मान सम्मान हैं। बेटी बचाने बेटी पढ़ाने के अभियान से देश का एक एक परिवार जुड़ना चाहिए।
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