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मुश्किल में घिरे पाकिस्तानी दोस्तों को भी दिया सहारा, बॉर्डर तक छोड़ा

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रोमानिया के एयरपोर्ट पर अपने साथियों के साथ धामपुर का दिव्यांशु। - फोटो : BIJNOR
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मुश्किल में घिरे पाकिस्तानी दोस्तों को भी दिया सहारा
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बिजनौर। भले ही पाकिस्तान को लेकर राय कुछ भी लेकिन भारतीय छात्रों ने पड़ोसी होने का धर्म भी बखूबी निभाया। मुश्किल में घिरे पाकिस्तानी दोस्तों को यूक्रेन में सहारा दिया। दरअसल तिरंगा लगी जो बस भारतीय छात्रों को लेकर जा रही थी, उसमें पांच पाकिस्तानी छात्र को भी बैठा लिया गया। 60 छात्रों से भरी बस में पांच पाकिस्तानी भी भारतीयों के साथ बैठे। उन्हें रोमानिया के बार्डर पर छोड़ा गया। यह आपबीती यूक्रेन से घर लौटे भारतीय छात्र एसोसिएशन के अध्यक्ष ने घर लौटकर सुनाई। उन्होंने बताया कि करीब 300 भारतीय छात्रों को बार्डर पार कराने में मदद की है।
धामपुर के गांव सिरियावाली के रहने वाले दिव्यांशु गहलोत पुत्र लव कुमार गहलोत यूक्रेन से घर लौट आए। जिन्हें देख परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अमर उजाला से बातचीत में दिव्यांशु ने बताया कि इवानो यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस फाइनल के छात्र हैं। द्वितीय वर्ष के दौरान यूनिवर्सिटी में हुए भारतीय छात्र एसोसिएशन के चुनाव में अध्यक्ष बने थे। बताया कि 15 बसों को किराए पर लिया गया। 26 फरवरी को इवानो से निकले। इन बसों के आगे भारतीय झंडे को लगाया गया। जब वे निकल रहे थे, तो पांच पाकिस्तानी दोस्तों ने बस में बिठाने के लिए कहा। ऐसे में भारतीय छात्रों ने उन्हें भी बैठा लिया। दिव्यांशु ने बताया कि रोमानिया के बार्डर पर काफी भीड़ थी। 48 घंटे तक खुले आसमान में रहे। फिर उन्होंने रोमानिया के अफसरों से बात कर बॉर्डर का दूसरा गेट खुलवाया और बॉर्डर पार किया।
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एक छात्र के हिस्से में आते थे पांच-छह चम्मच चावल
बिजनौर। कीव में बंकर में रहने के दौरान उन्हें सिर्फ दाल चावल दिए जाते। पांच से छह छात्रों के दल को एक प्लेट चावल मिलता। ऐसे में एक के हिस्से में सिर्फ कुछ ही चम्मत चावल आते, लेकिन डर की वजह से इसी में पेट भर जाता। यह आपबीती यूक्रेन से लौटे सुहेल ने सुनाई।
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मंडावर निवासी सुहेल पुत्र मोहम्मद फारुख इवानो में मेडिकल प्रथम वर्ष का छात्र है। अब पोलैंड के रास्ते होते हुए सुहेल घर पहुंचा तो माता-पिता की आंखों में आंसू छलक आए। बेटे को गले लगा लिया। सुहेल ने बताया कि पहले पोलैंड का बार्डर बंद था, लेकिन भारतीय मंत्रियों के पहुंचने पर पोलैंड बार्डर पर दिक्कत नहीं हुई।
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