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भुगतान में फिसड्डी वेव ग्रुप की चीनी मिलों का चीनी बिक्री कोटा बढ़ा

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भुगतान में फिसड्डी वेव ग्रुप की मिलों का चीनी बिक्री कोटा बढ़ा
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बिजनौर। भुगतान में फिसड्डी चीनी मिलों की शासन ने सुध ली है। ऐसी चीनी मिलों को चीनी बेचने के कोटे में शासन ने सुध ली है। वेव ग्रुप की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल का फरवरी की बिक्री का कोटा सरकार ने करीब डेढ़ गुना बढ़ाया है। ये चीनी मिल फरवरी में ज्यादा चीनी बेचेंगी। चीनी बेचने से मिलने वाली राशि से किसानों को भुगतान किया जाएगा।
चीनी मिलों का फायदा या नुकसान पूरी तरह से चीनी की कीमतों पर निर्भर होता है। दो साल पहले चीनी के दाम चार हजार रुपये प्रति क्विंटल के आसपास थे, लेकिन इसके बाद चीनी के दाम गन्ने के बंपर की पैदावार की वजह से गिर गए। एक बार तो चीनी के रेट 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए थे। चीनी की कीमतों को ज्यादा गिरने से रोकने के लिए सरकार ने चीनी के दाम 2900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किए थे। पिछले साल केंद्र सरकार ने चीनी के न्यूनतम दाम 3100 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किए। साथ ही चीनी की बिक्री का कोटा भी निर्धारित कर दिया। चीनी मिल अपने कोटे से ज्यादा चीनी बाजार में नहीं बेच सकती है। सरकार का उद्देश्य है कि बाजार में एकदम से चीनी की बाढ़ सी न आ जाए। बिक्री का कोटा निर्धारित कर चीनी की बाजार में आवक को नियंत्रित किया गया। चीनी मिलें भुगतान के लिए पूरी तरह से चीनी की बिक्री पर ही निर्भर हैं। वेव ग्रुप की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल ने किसानों के भुगतान के लिए शासन ने चीनी बिक्री का कोटा बढ़ाने की मांग की थी। दोनों चीनी मिलों पर किसानों का करोड़ों रुपया बकाया है। बिजनौर चीनी मिल पर अब भी पिछले पेराई सत्र का बकाया है। मिल ने चालू पेराई सत्र में फूटी कौड़ी का भी भुगतान नहीं किया है। किसानों के भुगतान के लिए शासन ने दोनों चीनी मिलों का बिक्री कोटा बढ़ाया है। बिजनौर चीनी मिल का जनवरी का चीनी बिक्री कोटा 13 हजार 800 क्विंटल था, इसे फरवरी में बढ़ाकर 25 हजार 910 क्विंटल किया गया है। इसके अलावा चांदपुर चीनी मिल का जनवरी का बिक्री कोटा 30 हजार क्विंटल था, इसे भी बढ़ाया गया है। फरवरी का बिक्री कोटा 45 हजार क्विंटल निर्धारित किया गया है। चीनी ज्यादा बिकने से मिलों को ज्यादा पैसा मिलेेगा और किसानों को भुगतान देने में आसानी होगी।
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नहीं बनाई रॉ शुगर
बिजनौर व चांदपुर चीनी मिलों ने पिछले साल विदेशों को निर्यात करने के लिए रॉ शुगर बनाई थी। रॉ शुगर पर मिलने वाली सब्सिडी केंद्र सरकार से अब तक नहीं मिल पाई है। इसलिए चालू पेराई सत्र में दोनों चीनी मिलों ने रॉ शुगर नहीं बनाई है।
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सीसीएल भी मिल रहा
बिजनौर चीनी मिल पर वर्तमान पेराई सत्र का 46 करोड़ व चांदपुर चीनी मिल का 73 करोड़ बकाया है। दोनों चीनी मिलों ने बैंकों से सीसीएल के लिए भी आंदोलन कर रखा है। बैंकों ने दोनों मिलों को सीसीएल देना शुरू भी कर दिया है।
चीनी बेचकर करेंगे भुगतान
बिजनौर चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक राहुल सिंह के अनुसार चीनी मिल का बिक्री कोटा बढ़ा है। चीनी बेचकर किसानों का भुगतान किया जाएगा।
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