बिजनौर। चीनी मिलें केवल किसानों की ही नहीं बल्कि गन्ना समितियों की भी बकाएदार हैं। समितियों को भी चीनी मिलों ने अब तक शत प्रतिशत अंशदान नहीं दिया है। इस अंशदान से समिति कर्मचारियों का वेतन निकलता है और विकास कार्य होते हैं।
जिले में नौ चीनी मिल चल रही हैं। इनमे से दो ने पिछले सत्र का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है। सात चीनी मिलों पर अब भी किसानों का बकाया है। चीनी मिलों को किसानों का बकाया भुगतान करने के लिए लगातार नोटिस किया जा रहा है। चीनी मिल गन्ना समितियों को भी अंशदान देती हैं। मिल जितनी कीमत का गन्ना खरीदती हैं, उसकी करीब तीन प्रतिशत राशि संबंधित गन्ना समितियों को दिया जाता है। इससे समिति के करीब 600 कर्मचारियों को वेतन मिलता है साथ ही गांवों में विकास कार्य कराए जाते हैं।
गन्ना समितियां किसानों के आवेदन पर सड़क, पुलिया आदि का निर्माण कराती हैं। लेकिन चीनी मिल लगातार किसानों का भुगतान लटका रही हैं। इसके साथ ही समितियों को मिलने वाला अंशदान भी अटका हुआ है। अंशदान पर भी गन्ना भुगतान की तरह समय से न करने पर ब्याज देना होता है।
चीनी मिल कुल अंशदान भुगतान बकाया ब्याज
धामपुर 13.08 5.58 7.49 .26
स्योहारा 11.80 8.14 3.65 .29
बिलाई 8.05 2.59 5.46 .36
बहादरपुर 6.57 4.95 1.61 .15
बरकातपुर 7.78 6.53 1.28 .19
बुंदकी 7.04 5.12 1.91 .13
चांदपुर 3.55 2.18 1.37 .06
बिजनौर 2.21 1.31 .90 .06
कुल 62.96 38.51 24.44 1.5
नोट:राशि करोड़ रुपये में है। यह स्टेटमेंट नवंबर मध्य का है।
समय से मिल रहा वेतन
समितियों को अंशदान समय पर न मिलने के बाद भी कर्मचारियों का वेतन प्रभावित नहीं हुआ है। जिले में काफी गन्ना होने की वजह से कर्मचारियों को वेतन मिल जाता है। विकास कार्य जरूर प्रभावित होते हैं। इस साल गन्ना विकास परिषद ने कुछ सड़कों के प्रस्ताव बनाकर भेजे थे। शासनस्तर से उन्हें अभी मंजूरी नहीं मिली है।
अंशदान देने को कहा
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार समिति कर्मचारियों को समय से वेतन मिल रहा है। मिलों से अंशदान देने के लिए कहा गया है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद सड़कों का निर्माण कराया जाएगा।