बॉर्डर से लेकर शहरों तक मुश्किलों में हैं छात्र
बिजनौर। -5 डिग्री तापमान और छत के नाम पर खुला आसमान। ऐसे में 12 से 14 घंटे तक रहना कितना दिक्कतों भरा हो सकता है। लेकिन यूक्रेन में फंसे छात्र इन हालातों से जूझ रहे हैं। बिजनौर की दो छात्राओं और कई छात्रों ने रोमानिया की सीमा पर बिना एक भी पल सोए रात बिताई। हालांकि दोनों छात्राएं और कुछ छात्र रोमानिया में दाखिल हो गए। जिन्हें फ्लाइट कब मिलेगी, यह मालूम नहीं।
सिर्फ रोमानिया की सीमा पर ही नहीं बल्कि यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में फंसे हुए छात्र भी परेशानी झेल रहे हैं। गांव सब्दलपुर के रहने वाले एमबीबीएस के छात्र जब्बार ने बताया कि वह पोल्टावा शहर में दो साथियों के संग फ्लैट में रुका हुआ है। 24 घंटे में एक ही बार खाना खा रहे हैं। सायरन बजते ही बंकर में जाना पड़ता है। रशीदपुर गढ़ी का रहने वाला हितेश चौधरी इवानो से शनिवार की सुबह बस से रोमानिया सीमा के लिए चला था। बस ने 20 किलोमीटर पहले ही छोड़ दिया। 20 किमी पैदल चलने के बाद सीमा पर देर शाम भारतीय समयानुसार 11 बजे पहुंचा। हितेश ने बताया कि रातभर -5 डिग्री तापमान में वहीं खड़े रहे। एक पल के लिए भी नहीं सो सके। रविवार की सुबह रोमानिया में हितेश दाखिल हुआ।
इमामा और शारीबा ने बिताए सात घंटे
मोहल्ला चाहशीरी के रहने वाले उम्मान की बेटी इमामा और नजीबाबाद की रहने वाली शारीबा भारतीय समयानुसार रविवार तड़के चार बजे रोमानिया की सीमा में दाखिल हो गई थीं। हालांकि रविवार की शाम होने तक बॉर्डर के पास से एयरपोर्ट जाने के लिए बस नहीं मिली थी। बिजनौर की ये दोनों छात्राएं शनिवार की शाम भारतीय समयानुसार नौ बजे पहुंच गई थीं। नजीबाबाद के रहने वाले छात्र मोहम्मद जैदी और माद हसन रविवार की शाम भारतीय समयानुसार पांच बजे रोमानिया में दाखिल हो गए थे। दोनों छात्र शनिवार की शाम छह बजे रोमानिया की सीमा पर पांच किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे। इन्होंने 24 घंटे तक कुछ नहीं खाया। माद हसन के पिता के मोबिन हसन ने बताया कि वहां भाषा की दिक्कत हो रही थी। -6 डिग्री तापमान में पूरी रात गुजारी। अब रोमानिया में आने के बाद उम्मीद जगी है।
चार दिन से बंकर में है रिहन और नौमान
धामपुर के रहने वाले मेडिकल के छात्र नौमान अंसारी और धामपुर की ही रिहन खान यूक्रेन के खारकीव में फंसे हैं। दोनों ही खारकीव यूनिवर्सिटी में प्रथम वर्ष के छात्र हैं। दोनों ही हॉस्टल के नीचे बंकर में चार दिनों से फंसे हैं। नौमान की माता नजमा अंसारी ने बताया कि उनके बेटे ने रविवार सुबह से कुछ खाया नहीं है। हालांकि मैस सौ कदम की दूरी पर है, लेकिन मैस तक जाने नहीं दिया जा रहा है।