सड़क किनारे जलाया जा रहा कूड़ा
बिजनौर। शहरों को साफ रखने का दावा करने वाली नगर पालिकाएं अपना कूड़ा सड़कों किनारे ठिकाने लगा रही हैं। शहर से बाहर जा रही सड़कों को कूड़ों से पाटा जा रहा है। कूड़ा निस्तारण के लिए नगर पालिकाओं के पास प्लान हैं लेकिन उसके निस्तारण के लिए अब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं किया गया है।
जिले में आठ नगर पालिकाएं व छह नगर पंचायत हैं। जिले में हर रोज करीब 600 मीट्रिक टन कूड़ा नगर पालिका व पंचायतों से निकलता है। नगर पालिकाओं का दायित्व है कि वह कूड़ा निस्तारण के लिए काम करे। कूड़े को अलग अलग करें। गीले कूड़े से खाद बनाकर बेचें और सूखे कूड़े जैसे लोहा, प्लास्टिक आदि को बेच दें। लेकिन नगर पालिका इस प्लान पर कोई काम नहीं कर रही हैं। शहर के बाहर जाती सड़कों पर खेतों के किनारे कूड़ा डाल दिया जाता है। पालिका कर्मचारी वहां पर और कई बार तो शहरों में ही कूड़े को आग लगा देते हैं। नगर पालिका की सीमा के बाहर विकसित हुई नई कॉलोनियों में यह समस्या और बड़ी होती जा रही है। ग्राम पंचायतों में तो कूड़ा निस्तारण के लिए कोई बजट ही नहीं होता है। सफाई कर्मचारी कॉलोनी के अंदर ही किसी खाली पड़े प्लॉट में कूड़ा डाल देते हैं। नगर पालिकाएं सालों से कूड़ा निस्तारण के लिए जमीन खरीदने को प्रपोजल ही शासन को भेजकर अपने कार्य से इतिश्री कर लेते हैं। किसी भी नगर पालिका में कूड़ा निस्तारण के लिए ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं।
अब तक हो रहा पॉलिथीन का प्रयोग
कूड़ा फैलाने के लिए नागरिक भी जिम्मेदार हैं। नागरिक पॉलिथीन का प्रयोग अब तक कर रहे हैं। सबसे ज्यादा कूड़ा पॉलिथीन का ही रहता है। नागरिक अपने घरों का कूड़ा पॉलिथीन में बांधकर नालियों में फेंक देते हैं। इससे नाली भी चोक हो जाती हैं। प्रशासन की सख्त कार्रवाई के साथ साथ अगर नागरिक खुद भी पॉलिथीन का प्रयोग करना बंद कर दें तो समस्या बहुत कम हो जाएगी।