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धूम्रपान से दूर रहकर सीओपीडी से रहे मुक्त

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धूम्रपान से दूर रहकर सीओपीडी से रहे मुक्त
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बिजनौर। फेफड़ों को प्रभावित करने वाला सीओपीडी केवल धूम्रपान से ही नहीं बल्कि खराब गुणवत्ता वाली हवा में सांस लेने से भी होता है। इससे दूर रहने के लिए धूम्रपान से दूर रहना चाहिए।
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छाती एवं सांस रोग विशेषज्ञ डॉ.अनिल अग्राल के अनुसार पहले माना जाता था कि सीओपीडी (कॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) केवल धूम्रपान करने वाले बुजुर्गों में ही होती है, लेकिन नए शोध से पता चला है कि यह प्रदूषित हवा से भी होता है। धूम्रपान न करने वाले लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। यह फेफड़ों पर असर डालता है। बताया कि श्वसन क्रिया के ऑक्सीजन हमारे खून में चली जाती है और कार्बन डाई ऑक्साइड बाहर चली जाती है। सीओपीडी में यह प्रक्रिया प्रभावित होती है और ऑक्सीजन की पूरी मात्रा शरीर में नहीं जा पाती है। इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। टीबी के मरीज ठीक होने के बाद अक्सर इस बीमारी का शिकार हो जाते हैं। सीओपीडी से दिल की बीमारी और कैंसर होने का खतरा भी रहता है। मरीज हाई ब्लड प्रेशर का भी शिकार हो जाते हैं।
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सीओपीडी के कारण
-धूम्रपान।
-रसायन और धूल भरे क्षेत्र में काम करना।
-घर गरम करने के लिए अंदर ईंधन जलाना।
-अनुवांशिक और बचपन में फेफड़ों का संक्रमण।
सीओपीडी के लक्षण
-सांस लेने में तकलीफ होना।
-लगातार खांसी रहना और बलगम आना।
-लगातार जुकाम और नाक में संक्रमण।
-थकान महसूस होना।
-नाखून व होंठ नीले हो जाना।
-छाती में जकड़न और सीटी जैसी आवाज होना।
बचने के उपाय
-धूम्रपान न करें।
-न्यूमोकोकल निमोनिया और फ्लू का टीकाकरण कराएं।
-अवसाद होने पर चिकित्सक से बात करें।
-उपचार का पालन करें।
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