बिजनौर। एक साल पहले जिला मुख्यालय स्थित इंदिरा पार्क में गौरैया हाउस बनाए गए। एक या दो नहीं 200 से ज्यादा लकड़ी से बने घर पेड़ों पर लगाए गए। कमाल यह रहा कि यहां गौरैया तो नहीं आई, लेकिन इन घरों में गिलहरी और मैना चिड़िया ने अपने घर बना लिए। वहीं अमानगढ़ में लगाए गए मिट्टी के घौंसलों में गौरैया दिखने लगी है।
आज गौरैया दिवस मनाया जा रहा है। जिले में जहां कई लोगों के घर ही गौरैया संरक्षण की मिसाल बन गए हैं, वहीं वन विभाग भी गौरैया संरक्षण में लगा है। एक साल पहले इंदिरा पार्क को गौरैया को समर्पित कर दिया गया था। इसके लिए विशेषज्ञों की सलाह लेकर लकड़ी के छोटे घर बनाकर पेड़ पर लगवाए गए। एक साल बीतने के बाद भी एक भी घर में गौरैया नहीं दिखाई दी। इन घरों में गिलहरी और मैना, वारवेट जैसी चिड़ियों ने कब्जा कर लिया है।
उधर केहरीरपुर में मिट्टी के घोंसलों का प्रयोग सफल रहा। वहां खूब गौरैया देखने को मिल रहीं हैं। डीएफओ ज्ञान सिंह ने बताया कि अब रेंज ऑफिस, डीएफओ ऑफिस के पास मिट्टी के घोंसले ही लगवाए जाएंगे। जो गौरैया संरक्षण में प्रयोग होंगे। वहीं इंदिरा पार्क में लगे घरों में दूसरे जीव दिख रहे हैं, वह भी उत्साह जनक है।
- आज हर वन रेंज में बनेगा गौरैया दिवस
डीएफओ ज्ञान सिंह ने बताया कि गौरैया पारिस्थितिक तंत्र ही नहीं, बल्कि संस्कृति का भी प्रतीक है। इसके संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए बिजनौर रेंज समेत सभी रेंज में कार्यक्रम कराए जाएंगे। स्कूलों के विद्यार्थियों को भी जागरूक किया जाएगा।
- गौरैया समझती है स्नेह : पवन राजपूत
बिजनौर की साहित्य विहार निवासी पवन राजपूत गौरैया प्रेमी हैं। उन्होंने अपने घरों में जो छोटे घर बनाए, वहां गौरैया रहती है। वह उनसे इतना लगाव करते हैं कि वह चम्मच से उन्हें पानी पिलाते हैं और वह डरती तक नहीं हैं।
- स्योहारा की गौरैया हवेली की दूर-दूर तक चर्चा
स्योहारा के मोहल्ला शेखनान में जमाल शेख की हवेली है, जो करीब 300 साल पुरानी है। यह हवेली अब गौरैया हवेली के नाम से चर्चित है। 20 मार्च को गौरैया दिवस पर इनके यहां कार्यक्रम भी होगा, जिसमें दूर-दूर से गौरैया प्रेमी आएंगे। आंगन में लगे पेड़ों पर दो हजार से ज्यादा गौरैया देखी जा सकतीं हैं। गौरैया प्रेम इतना है कि शेख जमाल की हवेली में छत के पंखे तक नहीं चलते। हवेली में पक्का काम नहीं कराया जाता, ताकि गौरैया को परेशानी न हो।
- ऐसे बढ़ेगा गौरैया का कुनबा
- छत, पार्क व बालकनी में बर्तन में दाना पानी भरकर रखें।
- प्रजनन के समय उनके अंडों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।
- घर के बाहर ऊंचाई व सुरक्षित जगह लकड़ी के घोंसले लगाएं।
- आंगन, पार्कों में कनेर, नींबू, अमरूद, अनार, बांस के पौधे लगाएं।