- निजी कार्यक्रम में पहुंचीं अनुराधा पौडवाल का नजीबाबाद में किया गया स्वागत
संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद। पार्श्व गायन और भजन दोनों गायन की विधाएं हैं और मेरे लिए दोनों ही अहम हैं। फिल्मों में गायन से करियर की शुरुआत हुई और अब भजन मेरी आत्मा बन चुका है। संगीत की गायन विधा में पद्मश्री से सम्मानित अनुराधा पौडवाल ने ये बात कहीं।
नजीबाबाद में निजी कार्यक्रम में पहुंचीं गायिका अनुराधा पौडवाल ने कहा कि गायन के क्षेत्र में नई पीढ़ी परफॉर्मर के रूप में तेजी से उभर रही है। किशोर दा भी परफॉर्मर रहे, जबकि मैंने सिंगर के रूप में फिल्मी गीतों और भजनों को आवाज देकर श्रोताओं के दिलों में स्थान बनाने का प्रयास किया है।
शुरुआती दौर में उन्होंने भगवत गीता का गायन किया। दुर्गा सप्तशती को स्वर दिया। पार्श्व गायन में वर्ष 1973 में अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की फिल्म अभिमान से कॅरिअर की शुरुआत करने वाली अनुराधा पौडवाल ने मेरी जंग, राम लखन, बंटवारा, हीरो, तेजाब आदि फिल्मों के गीतों को स्वर देकर लोकप्रियता पाई।
एनआईजीसी के कार्यक्रम में पहुंची अनुराधा पौडवाल का एमडी अवनीश अग्रवाल, सीए रविंद्र अग्रवाल, ज्योति अग्रवाल, अभिनव अग्रवाल, डॉ.संदीप अग्रवाल, डॉ.राखी अग्रवाल ने स्वागत किया।
गायन ने अनुराधा को दिलाए अनेक पुरस्कार
अनुराधा पौडवाल को भारत सरकार ने वर्ष 2017 में पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया। फिल्म उत्सव के गीत मेरे मन बजा मृदंग.., फिल्म आशिकी के गीत नजर के सामने.., फिल्म दिल है कि मानता नहीं.. के टाइटल गीत और फिल्म बेटा के धक-धक करने लगा.. गीत पर फिल्म फेयर पुरस्कार मिला।