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टीबी रोगियों को सेहत दुरुस्त कर रही सामाजिक संस्थाएं

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टीबी रोगियों की सेहत सुधार रहीं सामाजिक संस्थाएं
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बिजनौर। 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों को टीबी से बचाने के लिए जनपद की सामाजिक संस्थाएं आगे आई हैं। इन सामाजिक संस्थाओं ने अब तक इस आयु वर्ग के करीब 63 टीबी रोगियों को गोद लिया है। ये संस्थाएं इन बच्चों के पोषण का विशेष ध्यान रखेंगी।
टीबी पीड़ित बच्चों को गोद लेने की शुरुआत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने एक बच्ची को गोद लेकर की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है। यह उसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। जनपद में संचालित संगिनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था धामपुर ने सात, शेयर संस्था स्योहारा ने नौ, वर्क एक्शन फॉर रूरल बाबरपुर (स्याऊ) ने 16, रोटरी क्लब इंडस्ट्रीयल एरिया बिजनौर ने 18 बच्चे गोद लिए हैं। रोटरी क्लब आर्यन बिजनौर ने 13 बच्चों को समय पर दवाई लेने और उनके पोषण की जिम्मेदारी ली है।
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जिला क्षय रोग निवारण अधिकारी डॉ. बीएस रावत के अनुसार टीबी से पीड़ित ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से हैं। इनकी बीमारी बढ़ने की मुख्य वजह कुपोषित होना है। इससे उबरने के लिए केंद्र सरकार ने इनके लिए 500 रुपये प्रतिमाह निक्षय पोषण भत्ता के रूप में निर्धारित कर रखा है। जिले में पांच संस्थाएं टीबी रोगियों की सेवा में लगी हैं। इन संस्थाओं ने अब तक 18 साल से नीचे वाले करीब 63 टीबी मरीजों के पोषण की जिम्मेदारी ली है। वर्तमान में इस आयु वर्ग के लगभग 107 मरीज इलाज पर हैं।
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