तीन करोड़ में होगी नहरों की सिल्ट सफाई
बिजनौर। नहरों में सिल्ट जमा होने और झाड़ियों के उग आने से आखिरी टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता, इस समस्या से निजात पाने के लिए जिले में बड़े स्तर सिल्ट सफाई का काम होने जा रहा है। 823 किमी लंबी नहरों को साफ किया जाएगा। खासकर 574 किमी लंबी माइनर की सिल्ट निकाली जानी है, बाकी रजबहे की जमा सिल्ट को हटाया जाना है। इस काम में तीन करोड़ रुपये खर्च होंगे।
पूर्वी गंगा नहर के जिले में चार सिंचाई खंड हैं। जिनके अधिकार क्षेत्र में अलग अलग नहरें आती हैं। इन सभी खंडों की ओर से अपनी अपनी नहरों की सिल्ट सफाई के लिए 15 मई से अभियान चलाया जाएगा। जिसे एक महीने में ही पूरा करना है। 15 जून तक बरसात से पहले नहरों की सिल्ट सफाई कर ली जाएगी। मुख्य नहर और शाखा नहर को छोड़कर रजबहे और माइनर की सफाई होनी है। जिसमें 249 किमी रजबहे और 574 किमी लंबी माइनर की सिल्ट सफाई होनी है। अबकी बार खास बात यह भी रहेगी कि सिल्ट सफाई से पहले ड्रोन से सर्वे किया जाएगा, बाद में भी ड्रोन से सर्वे कर फोटो लिए जाएंगे। जिससे सिल्ट सफाई की हकीकत को भांपा जा सके। तीन करोड़ रुपये की लागत से सिल्ट सफाई कराई जाएगी। खंड चार के अधिशासी अभियंता नवीन कुमार बताते हैं पूर्वी गंगा नहर प्रणाली को सिर्फ बरसात में ही गंगा में आने वाला अतिरिक्त पानी मिलता है। यह परियोजना खरीफ की फसल के लिए डिजाइन की गई थी। केंद्रीय जल आयोग की तय नीति के अनुसार ही पानी का बंटवारा हुआ है। जिसके चलते बरसात में ही पानी मिलता है। इसलिए बरसात से पहले ही सिल्ट सफाई कराई जानी है।
पूर्वी गंगा नहर पर एक नजर
मुख्य नहर 48 किमी.
पांच शाखा नहर 155 किमी.
वितरण प्रणाली 1367 किमी.
104 हजार हेक्टेयर में हो रही सिंचाई
पूर्वी गंगा नहर सिंचाई प्रणाली से जिले में 104 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो रही है। हालांकि लक्ष्य 105 हजार हेक्टेयर रखा गया था। साल 2009 में पूर्वी गंगा नहर के पूर्ण किए जाने की रिपोर्ट की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। हालांकि कुछ किसान अभी भी कुछ जगहों पर अल्पिकाओं में पानी नहीं आने की शिकायत करते हैं।
सिंचाई के लिए नहीं मिल रहा पानी
नरेश कुमार ने बताया कि भीषण गर्मी में बिजली कटौती हो रही है। ऐसे में नहर में भी पानी नहीं है। जिसके चलते फसलों की सिंचाई समय से नहीं हो रही है। फसल सूखने की कगार पर है। हरवीर सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में ही सिंचाई के लिए पानी की अधिक जरूरत होती है और नहर सूखी पड़ी हैं। पानी नहीं आने से सिंचाई करना कठिन हो रहा है। नहर में समय पर पानी नहीं आता है। बरसात में ही पानी मिलता है, उस वक्त ज्यादा जरूरत भी नहीं होती। अब नलकूप से ही सिंचाई कर काम चलाना पड़ रहा है।
फिलहाल किसानों को सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है। अब नहरें सूखी पड़ी हैं। जल्द ही डीएम से मिलकर इस पर बात करेंगे। भले ही खरीफ के लिए ही पानी मिलता है, लेकिन सरकार को चाहिए कि 12 महीने जिले की नहरों में पानी छोड़े - दिगंबर सिंह, मंडल अध्यक्ष भाकियू