विश्व नर्स दिवस : मरीजों की सेवा के लिए हुआ नर्सों का सम्मान
बिजनौर। डॉक्टर अस्पताल का दिमाग है, तो नर्स अस्पताल का दिल है। दिमाग बंद हो जाए तो दिल चलता रहता है, लेकिन दिल बंद हो जाए तो दिमाग भी काम करना बंद कर देता है। यह विचार कार्यवाहक सीएमएस डॉ. मनोज सेन ने विश्व नर्सिंग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में रखे। जिला अस्पताल में विश्व नर्सिंग दिवस पर अमर उजाला की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कोरोनाकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले 15 नर्सों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. मनोज सैन ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में नर्स का बहुत बड़ा योगदान है। कॉलेज हमें डिग्री देते हैं, हम पढ़ाई करते हैं, लेकिन इंजेक्शन लगाने से लेकर कई तरह के काम अस्पताल में आने पर नर्स ही सिखाती हैं। उन्होंने फ्लोरेंस नाइटिंगेल के बारे में नर्सो को विस्तार से बताया गया। फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन को ही विश्व नर्सिंग दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि फ्लोरेंस नाइटिंगेल ही आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक थीं। जिसके चलते जनवरी 1974 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स की ओर से 12 मई को विश्व नर्स दिवस मनाने की घोषणा की गई। इसके साथ ही फ्लोरेंस ने गरीब और बीमारों की मदद की। कार्यक्रम में कार्यवाहक सीएमएस डॉ. मनोज सैन, डॉ. सुनील भटनागर, डॉ. हेमेंत, प्रबंधक डॉ. रोहित कुमार, नर्स पुष्पा निगम, पुष्पेंद्र सिंह, वसीम आदि मौजूद रहे।
चिकित्सक भी नर्सों से ही सीखते हैं : डॉ. मनोज
डॉ. मनोज सैन ने कहा कि सब कुछ पढ़ाई के दौरान किताबों से नहीं सिखा जाता है। डॉक्टर बनने की पहली सीढ़ी नर्स के पास से होकर जाती है। क्योंकि नर्स ही इंजेक्शन लगाना सिखाती है। नर्स पूर्णा भारद्वाज ने फ्लोरेंस नाइटिंगेल के बारे में विस्तार से बताया। नर्स ज्योति ने कहा कि फ्लोरेंस ने अपने नर्स के काम को बड़ी ही जिम्मेदारी से निभाया। उन्होंने लैंप लेकर सैनिकों की मदद की। अगर डॉक्टर अस्पताल का दिल हैं तो नर्स धड़कन हैं। नर्स रजनी शर्मा ने सभी को विश्व नर्स दिवस की शुभकामनाएं दी। नर्स सुदेश ने विश्व नर्स दिवस मनाने के महत्व पर प्रकाश डाला।