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Bijnor News: डेढ़ साल से शुद्ध पेयजल को तरस रहा गांव सिकंदरपुर बसी

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नजीबाबाद। तहसील की ग्राम पंचायत गांगूवाला उर्फ सिकंदरपुर बसी में करीब 2500 मतदाता हैं। बुंदकी मार्ग पर गांगन नदी के किनारे ऊंचाई पर बसे इस गांव में वाटर लेवल बहुत गहरा है। यहां सरकारी तो दूर, निजी हैंडपंप भी गिनती के हैं। ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए करीब डेढ़ दशक पहले शासन ने ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया था, जिससे लोगों को शुद्ध पेयजल मिलने लगा। लेकिन पिछले डेढ़ साल से ओवरहेड टैंक से जलापूर्ति ठप है। अचानक टैंक का बोरिंग फेल हो गया। गर्मी में पेयजल संकट और गहरा गया है और ग्रामीण पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
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गांव में गिनती के हैंडपंप
ग्रामीण श्रवण कुमार ने बताया कि पहले हर घर में सरकारी टंकी से जलापूर्ति होती थी। टंकी बनने से पहले गांव में सरकारी व निजी हैंडपंप गिनती के थे, जिनका पानी शुद्ध भी नहीं था। ग्रामीणों की मांग पर शासन ने डेढ़ दशक पहले टंकी बनवाई थी, जिसके बाद घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचने लगा था।

प्रशासन ने नहीं दिया ध्यान
मास्टर शिव कुमार जोशी ने बताया कि पहले टंकी की विद्युत मोटर में तकनीकी खराबी आने पर ग्राम पंचायत स्तर पर ही दुरुस्त कराकर जलापूर्ति बहाल हो जाती थी। लेकिन अब लंबे समय से टंकी बंद है। लोग पेयजल को तरस रहे हैं, मगर प्रशासन का टंकी दुरुस्त कराने पर कोई ध्यान नहीं है।
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निजी हैंडपंप पर खर्च अधिक
ग्रामीण अशोक पाल ने बताया कि टंकी बंद होने से मजबूरी में निजी हैंडपंप लगवाने पड़ रहे हैं लेकिन वाटर लेवल 170 से 250 फीट गहरा होने के कारण एक हैंडपंप पर 25-30 हजार रुपये तक खर्च आता है। गरीब आदमी इतना बोझ नहीं उठा सकता। ग्रामीण पेयजल के लिए भटक रहे हैं।

जल निगम को किया हैंडओवर
ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह ने बताया कि पहले मोटर में खराबी आने पर एक-दो दिन में ठीक कराकर जलापूर्ति सुचारू करा दी जाती थी लेकिन बोरिंग फेल होने के बाद ग्राम पंचायत ने टंकी को फिर से जल निगम को हैंडओवर कर दिया है।

उधर, जल निगम के जेई अजय कुमार ने बताया कि ओवरहेड टैंक को दुरुस्त कराने की कार्ययोजना शासन को भेज दी गई है। अनुमति मिलते ही रिबोर व टंकी की मरम्मत कराकर जलापूर्ति शुरू करा दी जाएगी।
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