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अनेक विद्याओं का संगम हैं सत्यराज

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अनेक विद्याओं का संगम हैं सत्यराज
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धामपुर। नगर के साहित्यकार सत्यराज सांस्कृतिक, साहित्यिक, संगीत, नाटक, समाज एवं राष्ट्र सेवा के क्षेत्र में बीते चार दशकों से निरंतर योगदान दे रहे हैं। सत्यराज ऐसे व्यक्ति हैं, जिनकी प्रेरणा और प्रोत्साहन से क्षेत्र के अनेक कलाकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा रहे हैं। उनके द्वारा लिखे नाटक ‘एक अनपढ़ शाम’ के 1000 से अधिक नुक्कड़ प्रदर्शन हो चुके हैं।
सत्यराज ने बताया कि उनकी करीब 200 कहानियां, लेख, व्यंग और नाटकों के लेखक सत्यराज की 21 कहानियां नामक एक पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है। देश में प्रकाशित होने वाले हिंदी पत्र-पत्रिकाओं में से अधिकांश में इनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। दूरदर्शन और आकाशवाणी से नाटक एवं कहानियां प्रसारित होती रहती हैं। नाट्य विद्या में भी सत्यराज ने कीर्तिमान स्थापित कर रखे हैं। संपूर्ण साक्षरता अभियान के कालखंड में एक दशक तक उनके लिखे नाटक ‘एक अनपढ़ शाम’ के 1000 से अधिक नुक्कड़ प्रदर्शन हो चुके हैं। इन्हीं के लिखे नाटक बंजारा का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपन्न नाटकों के ओलंपिक प्रदर्शन के अंतर्गत चयनित होकर मुंबई में प्रदर्शन हो चुका है।
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साहित्य विद्या से अलग सत्यराज को अभिनय और गायन का भी शौक है। बंधन प्रोडक्शन के तले सत्य राज द्वारा लिखित लघु फिल्म ‘हां मैं चोर हूं’ शॉर्ट मूवी ने यू ट्यूब पर धमाल मचा रखा है। इस फिल्म में सत्यराज ने पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभाया है। सत्य राज ‘अक्षर’ नामक सामाजिक संस्था के संस्थापक संयोजक भी हैं। अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा इन्होंने ‘एक रुपया प्रतिदिन देश के नाम’ से शीर्षक से एक अभियान भी चला रखा है। इसके अंतर्गत प्रतिवर्ष संग्रहीत राशि पीएम रिलीफ फंड में भेजी जाती है। संस्था अब तक 25 लाख से अधिक की धनराशि इस कोष में भेज चुकी है। अभियान अभी भी जारी है।
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