फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सहालग से फिर से फूलों की खेती में महक आने की उम्मीद

विज्ञापन
बिजनौर के गांव अगरी में जरबेरा फूल की खेती। - फोटो : BIJNOR
विज्ञापन
सहालग से फिर से फूलों की खेती में महक आने की उम्मीद
विज्ञापन

बिजनौर। सहालग के सीजन से फूलों की खेती करने वाले किसानों को बहुत उम्मीद है। लाखों रुपये कीमत के फूल कूड़ी पर फेंकने के बाद अब ये किसान उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाला सीजन फूलों की खेती में फिर से सुगंध भर देगा। फूलों की डिमांड फिर से पहले की तरह हो जाएगी। किसानों ने अपने ग्राहकों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
जिले के जागरूक किसान फूलों की खेती भी कर रहे हैं। पॉली हाउस में फूल लहलहा रहे हैं। फूलों का मुख्य बाजार बैंक्वेट हॉल में होने वाली सजावट है। इसके अलावा त्योहारी सीजन में एजेंसियों पर होने वाली सजावट में भी फूलों की खूब बिक्री होती है। पिछले सहालग के समय लॉक डाउन लगा था। कोरोना की वजह से शादी में दूल्हा केवल पांच परिजनों के साथ ही जा रहा था। बारात में सजावट का काम खत्म हो गया था और बैंक्वेट हॉल पर ताले लग गए थे। लाखों रुपये कीमत के फूल फेंकने पड़ गए थे। लेकिन अब फिर से शादियों का सीजन लौटने वाला है। शादियों के सीजन के हिसाब से ही किसानों ने फूलों की फसल तैयार की है। फसल अब बाजार में जाने के लिए तैयार हो गई है।
विज्ञापन

फूलों की बहुत है मांग
पॉली हाउस में जरबेरा, कारनेशन, ग्लेडियोलस, गेंदा आदि की खेती की जाती है। इन फूलों की बहुत मांग होती है। कभी छोटे से जिले की जरूरत के लिए ये फूल बाहर से आते थे लेकिन अब दूसरे जिलों में भी बिजनौर से फूल भेजे जाते हैं। फूलों की खेती में किसान मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
विज्ञापन

बाजार के रफ्तार पकड़ने का अनुमान
गांव अगरी में फूलों की खेती कर रहे किसान अखिलेश चौधरी के अनुसार पिछला सीजन बुरे सपने की तरह था। एक रुपये की आमदनी नहीं हुई। ऊपर से लेबर को फूलों की कटाई आदि में पैसे और देने पड़े। इस बार उम्मीद है कि बाजार रफ्तार पकड़ जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें