शिक्षक और कर्मचारियों की मौत पर मुआवजे पर नियमों का अड़ंगा
बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद बीमार हुए कई शिक्षकों ने कोरोना से तो कई ने अन्य बीमारियों के चलते दम तोड़ दिया है। लेकिन पंचायत चुनाव में कर्मचारियों की मृत्यु पर मिलने वाली अनुग्रह धनराशि के आदेश से शिक्षक व कर्मचारी हैरत में हैं। भले ही कर्मचारी संगठन 30 शिक्षक और कर्मचारियों की मौत होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन नियमों के अनुसार किसी को भी अनुग्रह धनराशि नहीं मिल पाएगी। अब कर्मचारी संगठन नियमों में बदलाव की मांग कर रहे हैं।
जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद कोरोना की चपेट में कई शिक्षक व कर्मचारी आ गए थे। शिक्षक संगठनों व कर्मचारियों की मानें तो 19 अप्रैल को हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद से अब तक 30 से अधिक कर्मचारियों व शिक्षकों की मृत्यु हो चुकी है। चुनाव के लिए जारी शासनादेश में चुनाव के की ड्यूटी के दौरान मरने वाले कर्मचारियों को अनुग्रह धनराशि देने का आदेश दिया गया था। अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि चुनाव ड्यूटी में वह मतगणना के दौरान जिन कर्मचारियों की असामयिक मृत्यु होगी उन्हें 15 लाख तथा अंग भंग होने पर साढ़े सात लाख, चुनाव के दौरान आक्रमण बम विस्फोट या कोविड-19 होने पर कर्मचारियों को 30 लाख की अनुग्रह धनराशि दी जाएगी। शासनादेश में कहा गया है कि ड्यूटी पर घर से जाने ड्यूटी करने तथा घर वापसी तक जिन कर्मचारियों की मृत्यु होगी उन्हें अनुग्रह धनराशि दी जाएगी।
चुनाव के बाद हुई मृत्यु तो कैसे मिले मुआवजा
शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि जिले में कई कर्मचारी व शिक्षक को कोरोना ड्यूटी के दौरान ही हुआ है। इस बीमारी में एक दिन में किसी की भी मृत्यु नहीं होती। ऐसे में शिक्षकों को अनुग्रह धनराशि उपलब्ध कराई जानी चाहिए। शासनादेश में कहा गया है कि शिक्षक व कर्मचारी की एंटीजन या आरटीपीसी की रिपोर्ट भी साथ में देनी होगी। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद शर्मा ने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा है। ताकि शिक्षकों के आश्रितों को अनुग्रह धनराशि दी जा सके।
सरकार के नियम पर क्या कहते हैं शिक्षक नेता
अटेवा के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रहास का कहना है कि चुनाव के बाद ही शिक्षक बीमार पड़ गए थे। जिले में 30 से अधिक शिक्षक व कर्मचारियों की मौत हुई है। शासन को नियम में बदलाव करना चाहिए। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री प्रशांत सिंह ने बताया कि जिन शिक्षकों व कर्मचारियों की चुनाव के बाद मृत्यु हुई है उनके साथ किसी भी सूरत में छल नहीं होने दिया जाएगा। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया कि शिक्षकों व कर्मचारियों के आश्रितों को उनका हक दिलवाया जाएगा।
हमारे पास अभी चुनाव ड्यूटी के दौरान किसी शिक्षक की मौत होने का रिकॉर्ड नहीं है। सूची मांगी गई है, उसके आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी - महेशचंद, बीएसए बिजनौर।