आरक्षित सीट, निशुल्क यात्रा, फिर भी पसंद नहीं रोडवेज
बिजनौर। बसों में सांसद और विधायक की सीट आरक्षित होती है। लेकिन करीब दो दशकों से बसों में विधायकों व सांसदों ने सफर नहीं किया है। साल 2006 तक रामस्वरूप सिंह ने नजीबाबाद से विधायक रहते हुए बसों में सफर किया। इसके बाद किसी ने भी विधायक रहते हुए बसों को अपनी मंजिल तक पहुंचने का जरिया नहीं बनाया है। अब बसों से ज्यादा आरामदायक लग्जरी कार हैं, जिनमें माननीय सफर करना पसंद करते हैं।
सांसद और विधायक की गाड़ी के आगे-पीछे चलती कारें उनकी शान में चार चांद लगाती हैं। अगर माननीय बस में सफर करेंगे तो उनके कपड़े तो गंदे होंगे ही, साथ ही लग्जरी कार का आनंद नहीं आएगा और उन्हें सामान्य लोगों के साथ ही सफर करना पडे़गा। बिजनौर रोडवेज डिपो की माने तो बसों में तीन विधायकों व पूर्व विधायकों ने सफर किया है। जिनमें रामस्वरूप सिंह, सुक्खन सिंह और सुखवीर सिंह का नाम शामिल है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध रखने वाले रामस्वरूप सिंह नजीबाबाद विधानसभा सीट से 2006 तक विधायक रहे, इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। साल 2006 तक उन्होंने बसों में ही सफर किया। इससे पहले इंडियन नेशनल कांग्रेस के विधायक सुक्खन सिंह आखिरी बार 1985 में नजीबाबाद विधानसभा सीट से विधायक चुने गए, इन्होंने भी बसों में खूब सफर किया है। इनके बाद किसी भी सांसद या विधायक ने रोडवेज बसों में सफर नहीं किया। उनकी आरक्षित सीट पर सामान्य लोग ही बैठकर यात्रा करते हैं।
बिजनौर डिपो पर तैनात बाबू सुंदर सिंह ने बताया कि जनता दल के टिकट से चुनाव लड़कर बिजनौर विधानसभा सीट पर 1991 में सुखवीर सिंह विधायक बने थे। सुखवीर सिंह अभी भी बसों में सफर कर लेते हैं। सुंदर सिंह बताते हैं कि वह 2016 तक बस में परिचालक थे। इसके बाद डिपो पर ही कार्य करने लगे। सुखवीर सिंह ने कई बार उनकी बस में सफर किया है। आज के दौर में बहुत ही कम लोग ऐसे मिलते हैं, जो बड़े पद पर होते हुए कभी भी जमीनी हकीकत को नहीं भूलते हैं।
लंबे समय से नहीं किया किसी ने सफर : एआरएम
एआरएम ललित त्रिवेदी ने बताया कि बिजनौर डिपो की बस में किसी भी विधायक या सांसद ने काफी अरसे से सफर नहीं किया है। बस में इनके लिए सीट आरक्षित रहती है और निशुल्क यात्रा का प्रावधान है। ऐसे में उनकी सीट पर अन्य यात्री ही बैठकर यात्रा करते हैं।