स्योहारा। पशुओं के कटान से निकलने वाले खून का निस्तारण नहीं होने और जल प्रदूषण की समस्या को लेकर 2018 से बंद मीट फैक्टरी को फिर चलाने के प्रयास में फर्जीवाड़ा किया गया। दरअसल जनप्रतिनिधियों के फर्जी अनापत्ति पत्र अदालत में दाखिल किए गए। अब इस मामले में प्रधानों और नगर पंचायत अध्यक्ष ने फैक्टरी स्वामी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है।
सहसपुर निवासी मीट कारोबारी हाजी अतीक अहमद ने 2013 में याकूबपुर गांव में उमर इंटरनेशनल मीट फैक्टरी लगाई थी। 11 जनवरी 2018 को एसडीएम धामपुर के नेतृत्व में प्रशासन की संयुक्त टीम ने फैक्टरी का औचक निरीक्षण किया तो पशुओं के खून के निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं मिलने और भूगर्भ जल के प्रदूषित होने पाया गया था। साथ ही अग्निशमन सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और अन्य खामियों के चलते प्रशासन ने फैक्टरी को सील कर दिया था। फैक्टरी का फिर से संचालन करने के लिए फैक्टरी स्वामी ने हाईकोर्ट तक केस लड़ा। हाईकोर्ट के आदेश पर 20 जनवरी को फैक्टरी की सील खोली गई थी।
इस केस में लगाए दस्तावेज की जांच हुई तो पता चला कि फैक्टरी मालिक ने नगर पंचायत सहसपुर की चेयरपर्सन नाहिद परवीन, नगर पंचायत के सभी 15 सभासदों, ग्राम सहसपुर देहात के प्रधान मोहम्मद आदिल और ग्राम रसूलपुर उर्फ राजीपुर के प्रधान दीपक कुमार के लैटर पैड पर अनापत्ति प्रमाण पत्र तैयार कराए। जब इन लोगों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने साफ किया कि न तो उन्होंने कोई एनओसी दी है और न ही उनके हस्ताक्षर या मोहर असली हैं। चेयरपर्सन नाहिद परवीन व दोनों ग्राम प्रधानों ने थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मीट फैक्टरी स्वामी हाजी अतीक अहमद निवासी मोहल्ला शेखान तलाई, सहसपुर के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के प्रयोग और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
हालांकि फैक्टरी स्वामी हाजी अतीक अहमद ने कहा कि उन पर लगे सभी आरोप निराधार हैं।
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