पांच गांवों में दुरुस्तीकरण शुरू, पक्षकारों को नोटिस जारी
बिजनौर। झाड़ी जंगल नदी और रास्तों की जमीन के राजस्व अभिलेखों को दुरुस्त करने का काम शुरू हो गया है। 12 गांवों में से पांच गांवों में जिन लोगों के नाम पर भी यह जमीन दर्ज है, प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर दिए हैं। नोटिस प्रक्रिया पूरी होने के बाद नाम खारिज कर वापस झाड़ी, जंगल नदी और रास्तों के नाम पर यह जमीन दर्ज करने की तैयारी हो रही है। दरअसल, 12 गांव में फैली 60 हजार बीघा जमीन के घोटाले में शासन पहले ही रिकॉर्ड दुरुस्ती करण का आदेश दे चुका है। वहीं, एनजीटी ने भी जमीन को वापस मूल रूप में दर्ज करने के आदेश एक साल पहले दिए थे।
नगीना तहसील के 12 गांव में फैली 60 हजार बीघा जमीन का घोटाला हुआ था। कुछ साल पहले मामले की जांच हुई तो सामने आया कि झाड़ीदार जंगल, नदी और रास्तों की जमीन की श्रेणी ही नहीं बदली गई थी, बल्कि संक्रमणीय भूमिधर भी बना दिया गया। सिर्फ एक व्यक्ति के नाम की गई हजारों बीघा जमीन बाद में समितियों, ट्रस्ट और प्राइवेट लोगों की मिलकियत बन गई। पिछले दो सालों से नगीना तहसील के गांव तेलीपाड़ा, राजपुर कोट, शंकरपुर, हल्लोवाली आदि समेत 12 गांवों की इस जमीन पर शासन स्तर से गठित हुई कमेटी भी जांच कर चुकी है। वहीं, एक साल पहले एनजीटी ने भी इस पर दुरुस्तीकरण के आदेश दिए थे।
वर्तमान स्थिति की बात करें तो नगीना एसडीएम ने कादरगंज, शंकरपुर, राजपुर कोट, हल्लोवाला समेत पांच गांवों की करीब दस हजार बीघा से ज्यादा जमीन के दुरुस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुराने रिकॉर्ड में जो जमीन नदी, रास्ता, जंगल की थी, वह उसकी के नाम पर दर्ज की जाएगी। इसके लिए पक्षकारों को नोटिस भी जारी कर दिए गए हैं और उनकी आपत्ति ली जा रही हैं। इसके अलावा अन्य बचे सात गांवों की जमीन का दुरुस्तीकरण भी शीघ्र होने की उम्मीद लगाई जा रही है।
पहले दी काश्त की अनुमति, फिर बदली श्रेणी
खतौनी फसली वर्ष 1359 में एक आदेश डाला गया, जिसमें लिखा गया बा हुक्म जंगलात आफिसर से एक रसूखदार व्यक्ति को काश्त करने की अनुमति दी जाती है। खतौनी फसली वर्ष 1360 में उस व्यक्ति का नाम दर्ज हुआ। फसली वर्ष 1362 में श्रेणी बदलकर एक करते हुए संक्रमणीय भूमिधर बना दिया गया। आदेश की तारीख साल 1952 लिखी गई थी, लेकिन शुरुआती जांच में भी आदेश की कोई कॉपी नहीं मिली। हुक्म देने वाले अफसर का नाम भी पता नहीं चला। शुरुआती जांच में ही इसे कूटरचित एंट्री माना गया।
हल्लोवाली में दिया हाकिम परगना साहब का हवाला
हल्लोवाली गांव में भी उसी व्यक्ति को जमीन दी गई। यहां हाकिम परगना साहब नगीना के आदेश का हवाला दिया गया। उस व्यक्ति को संक्रमणीय भूमिधर बनाया गया। बाद में समितियों और प्राइवेट लोगों को नाम खतौनी में दर्ज होते चले गए।
नगीना एसडीएम से आख्या मांगी गई थी। उसमें पता चला है कि पांच गांवों में दुरुस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है और पक्षकारों को नोटिस जारी किए गए हैं। दुरुस्तीकरण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं
- विनय कुमार, एडीएम प्रशासन बिजनौर