डा.सुधांशु कुमार जैन। (फाइल फोटो)
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स्योहारा (बिजनौर)। भारतीय लोकवनस्पति विज्ञान के जनक विख्यात वनस्पतिशास्त्री डा. सुधांशु कुमार जैन का मंगलवार को उनके लखनऊ आवास पर निधन हो गया। मूल रूप से स्योहारा जनपद बिजनौर निवासी डा. जैन अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजे गए। डा. जैन की पुस्तक डिक्शनरी ऑफ इंडियन फोक मेडिसिन एंड एथनोवॉटनी उन पुस्तकों में से थी, जिसे आधार बनाकर ही भारत को हल्दी का पेटेंट कराना संभव हुआ था। उन्होंने ही भारत में वनस्पति विज्ञान की लोक वनस्पति एथनोवॉटनी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी।
स्योहारा के जैन स्ट्रीट निवासी शाहू प्रकाश चंद जैन के बड़े पुत्र डा. सुधांशु कुमार जैन का जन्म 1926 में हुआ था। वे चार भाई पांच बहन थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्योहारा, मेरठ आदि में हुई थी। उन्होंने 1986 में एथनोवॉटनी संस्थान ग्वालियर की स्थापना की। वह 30 से अधिक पुस्तकों, सैकड़ों शोधपत्रों के लेखक, दर्जनों प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के मार्गदर्शक रहे। वे प्रसिद्ध पुस्तक फ्लोरा ऑफ इंडिया के संपादक थे। डा. जैन को एथनोवॉटनी, भारतीय वनस्पतिक सोसाइटी, भारतीय वनस्पतिक सर्वेक्षण कोलकाता एवं भारतीय एथनोवॉटनी संस्थान के लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके थे। डा. जैन लम्बे समय तक वोटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया के निदेशक रहे। वे विश्व अर्थशास्त्री पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई थे।
सीएसआईआर द्वारा जिन दस्तावेजों के आधार पर अमेरिका की अदालत में हल्दी के पेटेंट की लड़ाई जीती गयी उन दस्तावेज में डा. जैन द्वारा औषधीय पौधों पर लिखित पुस्तक शामिल थी। डा. जैन के निधन से नगर में शोक व्याप्त हो गया। उनके छोटे भाई स्व. विजय कुमार जैन के पुत्र शोभित जैन के निवास पर शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है।