चादर गैंग तक पहुंचना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर
बिजनौर। शहर कोतवाली के सामने मोबाइल फोन शॉप में हुई 50 लाख की चोरी के मामले में पुलिस को अभी तक कोई सुराग नहीं लग सका है। पुलिस चादर गैंग का हाथ मानकर चल रही है, लेकिन बिहार के चादर गैंग तक पहुंचना भी पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। पुलिस ने दिल्ली और उत्तराखंड खंगाल लिया है। लेकिन अभी तक चादर गैंग की लोकेशन तक नहीं मिल सकी।
शहर कोतवाली के सामने स्थित चंदन नामदेव के सैल सिटी मोबाइल के शॉप का 29 नवंबर की रात शटर उठाकर चोरों ने 50 लाख रुपये के मोबाइल फोन व 80 हजार रुपये चोरी कर लिए थे। चोर सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर अपने साथ ले गए थे। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले तो पांच चोर पैदल चोरी करके जाते दिखाई दिए।
गैंग का पुलिस के हाथ आना आसान नजर नहीं आ रहा है। पुलिस की पांच टीमें गैंग की तलाश में लगी हैं। पर गैंग की सही लोकेशन नहीं मिल रही। पुलिस ने उत्तराखंड, दिल्ली समेत कई जगह गैंग की तलाश में डेरा डाल दिया है। सीओ सिटी कुलदीप गुप्ता के मुताबिक पुलिस की कई टीम गैंग की तलाश में जुटी हैं।
- चादर लगाकर वारदात को अंजाम देता है गैंग
पुलिस के मुताबिक बिहार के चादर गैंग ने मोबाइल शॉप में चोरी की है। ये गैंग वेस्ट यूपी, उत्तराखंड व अन्य राज्यों में चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहा है। गैंग केवल मोबाइल की दुकानों को ही निशाना बनाता हैं। यह गैंग शटर तोड़, चादर गैंग व घोड़ासन गैंग के नाम से जाना जाता हैं। गैंग घटना करने जाते समय रास्ते में किसी होटल, रेलवे स्टेशन की पार्किंग में रुकता हैं। आने जाने के लिए किराए की गाड़ी से जाता है। अपने मोबाइल फोन बंद करके ये चोरी करते हैं। गैंग का एक सदस्य दुकान के बाहर चादर लेकर खड़ा हो जाता हैं। दो व्यक्ति दुकान का शटर खींचते हैं। एक व्यक्ति थैला लेकर दुकान के अंदर जाता है। मोबाइल को डिब्बों से निकालकर बैग व थैले में भर लेते हैं। बाकी गैंग के सदस्य दुुकान के आसपास खडे रहते हैं। चादर लगाकर दुुकान के अंदर गए सदस्यों को चादर से शटर खींचकर बाहर निकालते हैं। गैंग के मुखिया को मोबाइल फोन की कीमत का 40 प्रतिशत मिलता हैं। नेपाल में चोरी के मोबाइल बेचे जाते हैं।