चांदपुर के गांव स्याऊ में सेवानिवृत्त शिक्षक के आंगन में खिला दुर्लभ ब्रह्मकमल
चांदपुर। प्रकृति प्रेमी सेवा निवृत्त शिक्षक कैलाश चंद्र के आंगन में सोमवार रात ब्रह्मकमल का फूल खिला। फूल की कोमल पंखुड़ियों और दिव्य आभा को निहारने के लिए देर रात तक गांव के लोग उनकी चौखट पर पहुंचते रहे।
उत्तराखंड की पहाड़ियों में पाया जाने वाला यह दुर्लभ पुष्प है। कैलाश चंद्र ने बताया कि उन्होंने करीब 10 वर्ष पहले यह पौधा लगाया था। सेामवार की रात करीब 11 बजे ब्रह्मकमल खिला तथा करीब 12 बजे के बाद मुरझाना शुरू हो गया। कैलाश चंद्र ने अपने घर में चिड़ियों का संरक्षण भी कर रखा है। पेड़ पर घोंसले लगा रखे थे। जिस पर गौरैया की चहचाहट रहती है।
क्या है ब्रह्म कमल
ब्रह्म कमल एक अत्यंत पवित्र और दुर्लभ पौधा है। यह उत्तराखंड के केदारनाथ, पिंडारी ग्लेशियर, फूलों की घाटी आदि स्थानों पर। ब्रह्म कमल केवल साल में एक बार जुलाई से सितंबर के बीच महज कुछ घंटों के लिए खुलता है। इसे भगवान ब्रह्मा द्वारा उत्पन्न माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस फूल से भगवान गणेश को जीवन दिया गया था। इसे सौभाग्य, समृद्धि, और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।