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आसमान से बारिश, छत से पानी और आंखों से टपकते हैं आंसू...

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बिजनौर में पिता की मौत के बाद शुगर मिल के पास तालाब के किनारे फटी हुई पन्नी की झोपड़ी में रहने को म? - फोटो : BIJNOR
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बिजनौर। यूं तो सरकार हर गरीब को छत मुहैया कराने के दावे कर रही है, लेकिन पन्नी की झोपड़ी में रहने वाला बेसहारा और बेघर परिवार दावों की जमीनी हकीकत को बयां कर रहा है। दरअसल पति की मौत के बाद महिला बेटी और बेटे को साथ तालाब के किनारे पन्नी की झोपड़ी में रहने को मजबूर है। जब-जब आसमान में बादल छाते हैं तो हल्की बारिश में ही पन्नी की छत टपकने लगती हैं। पूरा परिवार बेबसी के आंसू रोने को मजबूर है।
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कभी चीनी मिल की आवासीय कॉलोनी में कविता भारद्वाज अपने पति और परिवार के साथ रहती थी। कविता के पति ही नहीं ससुर ने भी चीनी मिल में नौकरी की। दो पीढ़ियां चीनी मिल में नौकरी करती रही। वक्त ने करवट बदली तो कविता के पति कपिल देव शर्मा की नौकरी चली गई। परिवार सड़क पर आ गया। हालांकि कपिल ने दूसरी जगह नौकरी ढूंढ़ ली लेकिन छह महीने पहले कपिल देव शर्मा की मौत के बाद परिवार बेघर और बेसहारा हो गया। गांव में भी अपना घर नहीं था। ऐसे में कविता ने चीनी मिल के पास तालाब किनारे की पन्नी डालकर झोपड़ी बना ली। हालत यह हैं कि बारिश में झोपड़ी में गंदा पानी, कीड़े मकोड़े घुस आते हैं। यहां बदबू इतनी कि परिवार के इस हालत में रहने के बारे में सोचकर ही किसी का भी मन परेशान हो उठे। कविता की बड़ी बेटी राधिका इंटर की छात्रा है। उसका सपना आर्मी में जाने का है लेकिन अब फीस भी नहीं चुका पाती। घर में खाने के लिए कुछ नहीं था। किसान गन्ना तौलने के लिए आते हैं तो राशन दे देते हैं।
मजदूरी को मजबूर हुआ आठवीं का छात्र
कविता का बेटा वंश आठवीं का छात्र है। बहन के स्कूल की फीस नहीं भरी गई तो वंश मजदूरी करने के लिए मजबूर हो गया। शादी ब्याह में पानी पिलाने का काम करते हुए वंश अपनी और अपनी बहन की फीस का जुगाड़ कर लेता है। जिस महीने की फीस जमा हो जाती है तो दोनों भाई बहन स्कूल चले जाते हैं। जिस महीने फीस जमा नहीं हो पाती तो स्कूल जाना छोड़ देते हैं।
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योजनाओं का नहीं मिला लाभ
पन्नी की झोपड़ी में रहने वाली कविता को आवास योजना का लाभ मिलना तो दूर आज तक पेंशन का भी लाभ नहीं मिल पाया। हालांकि राशन कार्ड बना हुआ है, जिसमें दो यूनिट के आधार पर केवल दस किग्रा राशन ही मिल पाता है। ऐसे में महीनेभर के खाने की व्यवस्था भी नहीं हो पाती।
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इस मामले में जो भी संभव मदद होगी उपलब्ध कराई जाएगी। वहां संबंधित विभाग के अधिकारियों को भेजा जाएगा।
- केपी सिंह, सीडीओ, बिजनौर
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