मांग बढ़ी तो दूध के लिए शुरू हुई प्राइसवार
बिजनौर। लॉक डाउन खत्म होने के बाद अब दूध के दाम फिर से बढ़ने लगे हैं। दूध लेने के लिए थोड़ी प्राइसवार भी शुरू होने लगी है। हालांकि सहकारी क्षेत्र की पराग डेयरी प्राइसवार में पिछड़ रही है। किसानों को प्राइस वार शुरू होने से कुछ फायदा होने लगा है। दूध के दामों में और सुधार होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
कोरोना को हराने के लिए लगाए गए लॉक डाउन के समय दूूध की मांग एकदम से खत्म सी हो गई थी। पराग व अन्य डेयरियां दूध खरीदकर दिल्ली सप्लाई करती हैं। लॉक डाउन में श्रमिकों व अन्य वर्ग के दिल्ली छोड़ने से वहां दूध की खपत एकदम खत्म हो गई थी। तब जिले की डेयरियों ने किसानों से दूध उठाना बंद कर दिया था। दूध के दाम भी 44 रुपये प्रति लीटर से घटकर 33 से 34 रुपये प्रति लीटर तक रह गए थे। लेकिन अब फिर से दूध की मांग बढ़ने लगी है। मांग बढ़ने से दूध के दाम भी बढ़ने लगे हैं। दूध की मांग बढ़ने से डेयरियों में भी दूध के दामों के लिए थोड़ा थोड़ा प्राइसवार होना शुरू हो गया है। डेयरी एक दूसरे से ज्यादा दूध खरीदने को किसानों को एक दूसरे से अधिक दाम चुका रही हैं। अभी तक पराग ही किसानों को दूध के सबसे कम दाम दे रही है और भुगतान में भी परेशानी आ रही है।
डेयरी दूध का मूल्य
पराग 36
आनंदा 38
मधुसूदन 38
नमस्ते इंडिया 38
मदर इंडिया 38
अमूल 39
नोट : डेरी का दाम किसानों से लिया गया है और प्रति लीटर में हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जाता है पाउडर
दिल्ली में दूध तो जाने लगा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाला दूध का कारोबार अभी प्रभावित है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दूध का पाउडर व अन्य उत्पाद जाते हैं। यह व्यापार सामान्य हुए तो दूध के दाम और ज्यादा बढ़ेंगे। दुग्ध व्यवसाय को किसाना अब पहले से ज्यादा अपना रहे हैं। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए नौ हजार से ज्यादा किसानों ने ऋण के लिए आवेदन किया है। अब भी काफी किसान ऋण के लिए आवेदन कर रहे हैं। ये सब भी दुग्ध व्यवसाय से जुड़ रहे हैं।
त्योहारी सीजन से भी आस
लॉक डाउन खुला तो भी आइसक्रीम आदि बनने का काम शुरू नहीं हुआ। शादियों का सीजन भी नहीं था। ऐसे में व्यावसायिक रूप से खपत ज्यादा नहीं बढ़ी। लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए अब फिर से दूध के रेट पहले की तरह बढ़ने की उम्मीद है। पराग के प्रधान प्रबंधक मुरादाबाद मंडल दलजीत सिंह का कहना है कि अभी दूध की मांग पहले की तरह नहीं बढ़ी है, लेकिन धीरे धीरे बढ़ रही है। मांग के अनुसार ही किसानों को दूध का दाम दिया जाता है।