बिजनौर। बिजनौर-नगीना रोड पर एक कॉलोनाइजर को लाभ पहुंचाने के लिए वन विभाग द्वारा सौ साल पुराने पेड़ काटने में अब कार्रवाई की तैयारी चल रही है। लखनऊ से जांच के निर्देश के बाद एसडीओ ज्ञान सिंह ने पूरे मामले की जांच की। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिनमें बिजनौर रेंज के अधिकारी और कर्मचारी नप सकते हैं।
पिछले सप्ताह नगीना रोड पर फोर लेन बाइपास से पहले तीन पेड़ काट दिए गए थे। इनमें एक पेड़ करीब सौ साल पुराना था। । अमर उजाला ने 20 जून को सौ साल पुराने पेड़ कटवाने का मामला उठाया। इसके बाद लखनऊ से इसमें जवाब तलब हुआ। डीएफओ ने इसकी जांच एसडीओ ज्ञान सिंह को सौंप दी। सोमवार को जांच रिपोर्ट डीएफओ को सौंपते हुए रेंजर बिजनौर और जांच आख्या देने वाले कर्मचारियों की लापरवाही की बात सामने आई है।
जांच में सामने आए तथ्य बढ़ाएंगे मुसीबत
-पेड़ काटने की अनुमति किसान के प्रार्थना पत्र पर दी गई, जबकि मौके पर कॉलोनी कट रही है
-जांच में विकास कार्य में बाधा बताया गया, जबकि कोई सरकारी विकास इन पेड़ों के कारण बाधित नहीं मिला
-तीन पेड़ काटने की अनुमति थी, चौथा पेड़ भी आधा काट दिया गया
-जांच में नापतौल कर जितनी लकड़ी होने का अनुमान है, उससे आधी ही रेंज ऑफिस तक पहुंची
-पेड़ कटने से स्वत: ही कॉलोनी के लिए रास्ता बन गया, जबकि रास्ते के लिए भारत सरकार से अनुमति आनी थी और उसका पैसा वन विभाग जमा कराता
मुझे जांच सौंपी गई थी। जांच पूरी कर ली गई और उच्चाधिकारियों को सौंपी जा रही है। जांच में गड़बड़ी मिली है। रेंजर और रेंज कर्मचारियों की लापरवाही, भ्रामक रिपोर्ट देकर पेड़ कटवाने की अनुमति दिलवाने की बात भी सामने आई है।
-ज्ञान सिंह, एसडीओ बिजनौर