स्योहारा में सीएचसी के वार्ड में प्रसूता व परिजन अपने घर से लाए रजाई व चादर का प्रयोग करते हुए।
स्योहारा। मां बनने की सबसे संवेदनशील घड़ी में जहां अस्पतालों में सुरक्षा, स्वच्छता और गर्माहट मिलनी चाहिए, वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) स्योहारा में सिस्टम की बेरुखी साफ नजर आई। कड़ाके की ठंड में वार्डों में न हीटर की व्यवस्था है और न साफ बिस्तर और कंबल-चादर। प्रसव के बाद प्रसूताओं को फटे-पुराने गद्दों पर लिटाया जा रहा है जबकि बराबर में बंद पड़े वीआईपी वार्ड में साफ-सुथरी सुविधाएं हैं।
सीएचसी स्योहारा के वार्ड में दो प्रसूताएं भर्ती थीं। नेहा पत्नी विकास निवासी ग्राम मंडोरी और परवीन खातून पत्नी फिरोज सलमानी निवासी ग्राम रतनपुरा के परिजनों ने बताया कि प्रसव के बाद उन्हें फटे-पुराने गद्दों पर ही लिटा दिया गया। अस्पताल से बिछाने-ओढ़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं मिली, मजबूरन घर से रजाई, कंबल और चादर मंगानी पड़ी। कड़ाके की ठंड में वार्ड में हीटर तक नहीं था। परिजनों का आरोप है कि जहां सामान्य वार्ड में अव्यवस्थाओं का अंबार है, वहीं ठीक बगल में बंद पड़े ‘वीआईपी वार्ड’ में साफ-सफाई और सुविधाएं भरपूर थीं।
साफ गद्दे, सफेद चादरें और हर बेड पर कंबल बिछे पाए गए। यह दृश्य देखकर मरीजों और परिजनों में आक्रोश फैल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में गरीब और वीआईपी मरीजों के बीच खुला भेदभाव किया जा रहा है।
जरूरतमंद प्रसूताओं को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है, जबकि वीआईपी वार्ड में सुविधाएं धूल फांक रहीं हैं।