कालागढ़। सर्दी के मौसम में वनों में बाघ सक्रिय होने पर मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं से बचाव के लिए गश्ती दलों ने सीमावर्ती ग्रामों की जलौनी लकड़ी लेने गई महिलाओं को जंगलों से बाहर किया।
कार्बेट टाइगर रिजर्व की कालागढ़ रेंज की दक्षिणी सीमा लांघकर बड़ी संख्या में जनपद बिजनौर की उत्तरी सीमा स्थित, कल्लूवाला, मीरापुर,इस्लामनगर पंचायत के ग्रामों की महिलाएं जलौनी लकड़ी लेने के लिए सुबह से ही वनों में पहुंच जाती हैं। मीरापुर संपर्क मार्ग, रजत जयंती द्वार, सूखासोत, हनुमान मंदिर, सैडिल बांध तिराहा के अलावा अनेक स्थानों से ग्रामीण महिलाएं समूह बनाकर जंगलों में प्रवेश कर रही हैं। इस क्षेत्र में बाघ विचरण कर रहे हैं। वन विभाग ने बुधवार को वनों में जलौनी लकड़ी लेने गई महिलाओं को बाघ से सुरक्षा के चलते जंगल से बाहर किया। अभियान में वनक्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में भारत सिंह रावत, सरत सिंह बिष्ट, रक्षित पाण्डे, सोनम आदि शामिल रहे।
मुनादी कर जंगलों से दूर रहने को चेताया
केंद्रीय कॉलोनी व उसके पीछे जंगल में गत वर्षों में महिलाएं व कंदरू में एक वनकर्मी भी बाघ के हमले का शिकार होकर जान गंवा चुका है। वन क्षेत्राधिकारी एनके रुवाली ने बताया कि कड़ाके की ठंड और कोहरे के दौरान मानव वन्यजीव संघर्ष की घटना की आशंका बढ़ जाती है। वन संपत्ति की सुरक्षा व आने वाले समय में वनाग्नि को लेकर भी चिंता है। वनों में जाने से बचना चाहिए। क्षेत्र के नागरिकों को भी इसमें सहयोग करना चाहिए। सीमा पर मुनादी की वनों से दूर रहने को चेताया गया है।