जुमे की नमाज में की अमनोअमान की दुआ
गजरौला शिव/बिजनौर/नींदड़ू। रमजान माह के तीसरे जुमे की नमाज शांति व अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों में नमाजियों का सैलाब उमड़ पड़ा। मस्जिदों में जगह न मिलने के कारण छतों व बाहर रास्तों पर शामियाने लगाकर नमाज अदा की गई। महिलाओं ने भी घरों में जुमे की नमाज अदा की।
नमाज से पूर्व मौलानाओं ने रमजान की फजीलत बयां की। कारी नाजिम कासमी ने कहा कि रमजान के महीने में अल्लाह की बहुत ज्यादा रहमतें, बरकतें उतरती हैं। इस्लाम के पांच स्तंभों में से जकात भी इस्लाम का एक स्तंभ है। मुसलमान जिस तरह रोजे रखते हैं, तरावीह पढ़ते हैं, सदका व खैरात देते हैं, इसी तरह से रोजा, नमाज, हज फर्ज है, उसी तरह से माल की जकात निकालना भी फर्ज है। शहर की मोहल्ला चाहशीरी जामा मस्जिद में मौलाना वरीस अहमद, काजीपाड़ा में मरकज वाली मस्जिद में मुफ्ती शमसुद्दीन, मिर्दगान वाली मस्जिद में कारी हन्नान, बाहर वाली मस्जिद में हाफिज इस्लामुद्दीन, मोती मस्जिद में कारी रजब अली, नूरानी मस्जिद में कारी खुर्शीद, अक्शा मस्जिद में मौलाना इमरान, स्टेशन वाली मस्जिद में कारी अरशद, कचहरी मस्जिद, जजी वाली मस्जिद आदि जामा मस्जिदों में मौलानाओं ने जुमे की नमाज अदा कराई। नमाज के बाद मुल्क में अमनोअमान व खैर के लिए दुआएं मांगी गई। देहात और कस्बों की मस्जिद में भी नमाज अदा की गई।
वहीं, नींदडू़ क्षेत्र की जामा मस्जिद, जीनतुल इस्लाम, मोती मस्जिद, पीर फतह अली शाह, मदीना मस्जिद, अबबक्र, मस्जिद उमर, सुनहरी मस्जिद और मस्जिद सादात समेत करीब करीब सभी मस्जिद में बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की।