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प्रबल हत्याकांड: बिजनौर के रसूखदारों का नया पता जेल की बैरक नंबर आठ; कभी बोले थे- जितना चाहो, उतना पैसा ले लो

Sun, 02 Aug 2026 11:37 AM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर

सार

Bijnor News: प्रबल अग्रवाल की हत्या में कोर्ट ने आशीष अग्रवाल, विनय अग्रवाल, अपूर्व अग्रवाल, अनुज गुप्ता, राहुल गुप्ता, निखिल अग्रवाल, संजय गुप्ता को दोषी करार दिया है। जेल में संजय गुप्ता कैदी नंबर 234, विनय अग्रवाल कैदी नंबर 233 के रूप में जाने जाएंगे। 
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प्रबल की फाइल फोटो और इंसाफ मिलने पर छलके प्राची के आंसू। - फोटो : अमर उजाला
प्रबल हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए शहर के रसूखदारों का नया पता बिजनौर जेल की बैरक नंबर आठ है। कैदी नंबर 234... जेल में यह क्रमांक संजय गुप्ता को मिला है, जबकि विनय अग्रवाल का नाम कैदियों के रजिस्टर में 233वें क्रमांक पर रखा गया है। इसी तरह से अन्य पांच के भी कैदी नंबर जारी कर दिए गए हैं।
 
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जेल जाते सातों हत्यारे। - फोटो : अमर उजाला
प्रबल हत्याकांड में बुधवार को अदालत ने राज्य महिला आयोग सदस्य संगीता अग्रवाल के पति विनय अग्रवाल बेटे अपूर्व अग्रवाल और रामलीला समिति के संरक्षक संजय गुप्ता एडवोकेट समेत सात आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया था। इस मामले में अदालत ने शुक्रवार को सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सातों अभियुक्त बुधवार से ही जेल में बंद हैं। सभी को जेल की बैरक नंबर आठ में रखा गया है। 
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हत्यारों को जेल ले जाती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
इन्हें कैदियों के रजिस्टर में नंबर भी जारी किए जा चुके हैं। इसके साथ-साथ ही इन सातों कैदियों को सफेद रंग के कपड़े दे दिए गए हैं, जिससे दूर से ही पहचान हो सके। ये कैदी अपने घर से ले जाए हुए मनपसंद कपड़े नहीं पहन पाएंगे क्योंकि हवालाती बंदियों को ही घर के कपड़े पहनने की आजादी होती है। सजायाफ्ता कैदी जेल के नियमों के अनुसार सफेद रंग के कुर्ता पायजामा या पैंट शर्ट पहन सकते हैं।
 

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जेल जाते हत्यारे। - फोटो : अमर उजाला
करवटें बदलते हुए कट रही रात
जेल में गए सभी सातों मुजरिमों की रात करवटें बदलते हुए बीत रही है। जेल सूत्रों की मानें तो जेल में आने के बाद कुछ दिनों तक कैदी या बंदी खुद को असहज महसूस करता है। ऐसे में दो-चार दिन तक दिक्कत होती है। प्रबल हत्याकांड में आए सातों मुजरिम भी रात में कम ही सो रहे हैं।
 
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जेल जाते हत्यारे। - फोटो : अमर उजाला
प्रबल की हत्या में ये हैं जेल में बंद
संजय गुप्ता पुत्र एसके गुप्ता निवासी मोहल्ला बाजार संभा
विनय अग्रवाल पुत्र सुरेंद्र प्रसाद अग्रवाल निवासी कृष्ण प्लाजा मार्केट
अपूर्व अग्रवाल पुत्र विनय अग्रवाल निवासी कृष्ण प्लाजा मार्केट
निखिल अग्रवाल पुत्र रविंद्र कुमार अग्रवाल निवासी मोहल्ला जाटान
राहुल गुप्ता पुत्र राजवीर गुप्ता निवासी मोहल्ला खत्रियान
अनुज गुप्ता पुत्र घनश्याम दास गुप्ता निवासी नई बस्ती बिजनौर
आशीष उर्फ आशु अग्रवाल पुत्र राजेंद्र अग्रवाल निवासी मोहल्ला जाटान
 
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प्रबल की बहन प्राची। - फोटो : अमर उजाला
अभी नहीं आया कोई मुलाकाती: जेलर
जेलर कस्तूरी लाल गुप्ता ने बताया कि सातों कैदियों को बैरक नंबर आठ में रखा गया है। इनके क्रमांक भी दर्ज कर लिए गए हैं। इन्हें जेल में चार दिन बीत गए हैं मगर अभी तक कोई मुलाकात करने नहीं आया है।
 
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प्रबल की अंतिम यात्रा में उमड़ी थी भीड़। फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
फड़ वालों से वसूली का विरोध करता था प्रबल
रामलीला मैदान के पैठ बाजार में फड़ लगाने वालों से वसूली का विरोध प्रबल अग्रवाल किया करता था, इस बात का जिक्र प्रबल की बहन ने अदालत में दिए बयानों में किया है। उगाही के विरोध के कारण रामलीला कमेटी के संरक्षक संजय गुप्ता और विनय आदि प्रबल से रंजिश रखते थे।
 

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प्रबल अग्रवाल की फाइल फोटो और फैसला आने के बाद रोती बहन प्राची। - फोटो : अमर उजाला
ऐसे की थी हत्या 
19 दिसंबर 2012 को शहनाई बैंक्वेट हॉल में आयोजित अग्रसेन जयंती कार्यक्रम में आलोक अग्रवाल का बेटा प्रबल अग्रवाल भी शामिल हुआ। इस कार्यक्रम में एक लड़की से बात करने का आरोप लगाते हुए प्रबल अग्रवाल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद आरोपियों ने प्रबल के शव को गंगा में ले जाकर फेंक दिया। 15 जनवरी 2013 को हस्तिनापुर के पास गंगा खादर में प्रबल का शव बरामद हुआ था। उस वक्त आरोपियों को पकड़ने में की जा रही पुलिस की हीलाहवाली के कारण शहर में धरने प्रदर्शन भी हुए। आखिरकार पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। एक बालअपचारी की पत्रावली को अलग करते हुए किशोर न्याय बोर्ड भेज दिया गया था।
 

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प्रबल अग्रवाल की बहन प्राची। - फोटो : अमर उजाला
प्रबल की बहन प्राची के बयान
प्रबल की बहन प्राची ने अदालत में अपने बयान में कहा था कि उनके पिता की दुकान रामलीला मैदान के सामने थी। रामलीला मैदान में बुधवार और रविवार को लगने वाली अवैध पैठ से वसूली होती थी। उनकी दुकान के बाहर भी बाजार की कुछ फड़ लगती थीं। फड़ वालों से वसूली का विरोध प्रबल कभी-कभी कर देता था। जिस पर कुछ फड़ वाले उगाही देने से मना करने लगे थे। इसे लेकर संजय गुप्ता, विनय आदि उसके भाई से बोलचाल हो जाती थी। बाद में इन लोगों ने एक राय होकर षड्यंत्र रचा और उसके भाई की हत्या करके लाश गायब कर दी थी।

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रोते हुए जेल गया था अनुज गुप्ता। - फोटो : अमर उजाला
जितना मन हो उतना रुपया चेक में भर लो..
प्राची अग्रवाल ने अपने बयान में यह भी कहा कि 25 दिसंबर 2012 को एक मीटिंग शंभा बाजार में हुई। जिसमें उन्हें भी बुलाया गया। इस मीटिंग में वह अपने पापा आलोक अग्रवाल के साथ पहुंची थी। मीटिंग में आशीष अग्रवाल, संजय गुप्ता आदि भी आए। उन्होंने कहा था कि आपका बेटा हमसे मारा गया है। इन लोगों ने खाली चेक दिखाया और कहा कि जितना मन हो उतना रुपया भर लो। लेकिन पापा ने चेक नहीं लिया और केस वापस लेने से मना कर दिया था।
 

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सजा होने के बाद जेल जाते हत्यारे और नारे लगाते उनके परिजन। - फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका पर चार अगस्त को होगी सुनवाई
बिजनौर की अदालत सात अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है। मगर मृतक प्रबल की बहन प्राची लंबी कानूनी जंग लड़ने की तैयारी में हैं। फरवरी 2026 में पुन: निरीक्षण दाखिल कर 13 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाने की मांग की थी, जिस पर चार अगस्त को सुनवाई होगी।

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सजा के वक्त खूब रोए थे दोषियों के परिजन। - फोटो : अमर उजाला
प्रबल हत्याकांड में पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अहमद जकावत के अनुसार प्रार्थना पत्र के जरिए अन्य लोगों के नाम भी पुलिस को बताए गए थे। पुलिस ने अपनी विवेचना में कुछ नाम शामिल भी किए और कुछ निकाल दिए थे। पुलिस की ओर से एक बालअपचारी समेत आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। इस घटना में सचिन अग्रवाल, रविंद्र अग्रवाल, दिपांशु उर्फ दीपू, संजीव सिंघल, अर्पित, अरविंद अग्रवाल, अजय अग्रवाल उर्फ राजू, रजनीश अग्रवाल, मोनू, घनश्यामदास गुप्ता, संजू, अक्षत अग्रवाल के शामिल होने का आरोप है। इसे लेकर बिजनौर की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद प्राची अग्रवाल ने हाईकोर्ट की शरण ली।
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सजा के वक्त कचहरी में रोते दोषियों के परिजन। - फोटो : अमर उजाला
वहीं प्रबल हत्याकांड में अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अजीत पवार, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रमोद शर्मा ने भी मजबूती के साथ पैरवी की। वहीं ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत भी अभियोजन ने अदालत में पैरवी की।

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