जानकारी का अभाव और लालच साइबर अपराधियों के जाल में फंसा सकता है। इस ऑनलाइन ठगी से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है, वो है जागरूकता। हालांकि साइबर अपराधी ठगी करने के नए-नए तरीके अपनाने लगे हैं। अब लोन और गेमिंग के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है।
बिजनौर में सोमवार को आयोजित कार्यशाला में पुलिस की साइबर सेल में तैनात विशेषज्ञों ने बेबाकी के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने अमर उजाला की टीम से बताया कि साइबर अपराध में इंटरनेट का सहारा लिया जाता है। ये आर्थिक हानि पहुंचाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं। ऑनलाइन और 1930 पर शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं।
बिजनौर जिले में महीने भर में करीब 20 से 25 शिकायत दर्ज हो जाती हैं। अगर 24 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज हो जाती है तो उसमें रकम वापसी की संभावना ज्यादा रहती है। साइबर सेल की टीम में शामिल अश्विनी राणा, जितेंद्र सिंह और विवेक तोमर ने साइबर अपराध के संबंध में सवालों के जवाब देकर जिज्ञासाओं को शांत किया। बिजनौर में पोर्टल के माध्यम से 1895 शिकायतें दर्ज कराई थीं, जिनमें 1798 शिकायतों का निस्तारण कर लिया गया है। हालांकि 177 शिकायतों का निस्तारण अभी लंबित है।
साइबर सेल की टीम ने दिए सवालों के जवाब
सवाल - साइबर अपराध से कैसे बचें
जवाब - इंटरनेट पर हमारा डाटा हर जगह है। साइबर अपराधी पहले डाटा चोरी करते हैं। नंबर जुटाकर कॉल की जाती है। अक्सर हनी ट्रैप के मामलों में अपराधी विपरीत लिंगी प्रोफाइल बनाकर मैसेज भेजते हैं, फिर से वीडियो कॉल करते हैं, जहां रिकॉर्डेड वीडियो दिखाई जाती है, वहीं आपकी कॉल रिकॉर्ड होने लगती है। कुछ ही देर में आपकी अश्लील वीडियो बनाने के बाद कॉल करते हैं और पैसों की डिमांड की जाती है। इससे बचने के लिए ऐसी कॉल को अस्वीकार करें। अगर शिकार हो गए हैं तो पहले परिवार को विश्वास में लें और फिर थाने में या ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं। किसी भी खाते में पैसा जमा नहीं कराएं।
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