बिजनौर/हल्दौर। चिकित्सक की फीस जमा करने में असमर्थता व्यक्त करने पर बिजनौर स्थित श्रेया हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज करने से मना कर दिया। बेबस पिता क्षेत्र के कई गांवों से चंदा एकत्र कर बेटे का जीवन बचाने का प्रयास कर रहा है।
नूरपुर ब्लॉक के गांव औलियापुर निवासी रामगोपाल सिंह का पुत्र अवनीश 11 सितंबर को रिश्तेदारी में गांव मंडावर क्षेत्र के गांव इनामपुरा से बाइक द्वारा नूरपुर थाना क्षेत्र के गांव धमड़ौली निवासी एक रिश्तेदार के साथ घर लौट रहा था। बाइक गोलबाग के समीप फिसलने से अवनीश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया, साथी को मामूली चोट आईं। राहगीरों ने दोनों घायलों को प्राइवेट एंबुलेंस से बिजनौर अस्पताल भेजा और सूचना उसके परिजनों को दी। एंबुलेंस वाले ने कमीशन के चक्कर में घायल को निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकों ने उसके पुत्र के उपचार की फीस पांच हजार रुपये प्रतिदिन कहकर भर्ती कर लिया। दो दिन पूर्व घायल युवक का पिता उपचार की फीस करीब एक लाख लेकर व अस्पताल से छुट्टी दिलाने के लिए पहुंचा। रामगोपाल के अनुसार चिकित्सकों ने उससे रकम लेकर दोबारा करीब एक लाख रुपये का बिल दोबारा थमा दिया। बेबस पिता ने चिकित्सक से अपने कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला दिया, लेकिन चिकित्सक ने उसे बिल जमा करने के लिए एक लाख रुपये की निर्धारित रकम और लाने को कहा। इतना ही नहीं चिकित्सक ने उसके पुत्र को भी डिस्चार्ज नहीं किया। बेबस पिता अपने गांव पहुंचा। इसके बाद औलियापुर, इनामपुरा, गौसपुर धोलागढ़ आदि गांव के ग्रामीणों से अपने पुत्र के उपचार की फीस जमा करने के लिए चंदा मांगा। अवनीश के अस्पताल से अपने घर न आने पर उसके परिजन काफी परेशान हैं।
हॉस्पिटल संचालक डा. रोबिन तायल ने बताया कि अवनीश बहुत ही गंभीर मरीज था। फिलहाल उसका अस्पताल में ही उपचार चल रहा है। करीब 18 दिन से मरीज भर्ती है। वह वेंटिलेटर पर था। उसका ठीक प्रकार से इलाज किया गया है। परिजनों के सभी आरोप निराधार हैं।