बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग डेंगू व मलेरिया की रोकथाम के लिए केवल कागजी तैयारी के साथ मैदान में उतर रहा है। चिह्नित किए गए 114 अति संवेदनशील क्षेत्रों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया। इन क्षेत्रों में बीमारियों की रोकथाम के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए।
हर साल डेंगू व मलेरिया के मरीजों की संख्या को देखते हुए मलेरिया विभाग ने अतिसंवेदनशील जगह चिह्नित की थीं। इसका उद्देश्य इन स्थानों पर सफाई, फॉगिंग, जागरुकता अभियान, हेल्थ कैंप आदि लगाकर बीमारी की रोकथाम करना था। लेकिन, जलभराव, गंदगी और नियमित फॉगिंग न होने से मच्छरों की तादाद बढ़ रही है। कई अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में जलभराव और गंदगी की भरमार है। इसकी वजह से यहां बीमारियां बढ़ रहीं हैं। रोकथाम के प्रयास धरातल पर कम ही दिखाई दे रहे हैं। अस्पतालों में मच्छरों से होने वाली बीमारियों के मरीजों की संख्या में भी इजाफा है। चिकित्सकों का कहना है कि यही बीमारियां मलेरिया और डेंगू का रूप ले लेतीं हैं।
- आवास विकास कॉलोनी मलेरिया और डेंगू को लेकर अतिसंवेदनशील क्षेत्र है लेकिन, यहां गंदगी व जलभराव से बुरा हाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई की ओर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है। बरसात से पहले इसका हल नहीं हुआ तो बीमारी का खतरा और अधिक बढ़ सकता है।
- बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके
- पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
- आसपास गंदा पानी न जमा होने दें।
- जाली के दरवाजे बंद रखें।
- बुखार या कोई समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
- वर्जन
जिला मलेरिया अधिकारी मंजूशाह गुप्ता ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में नियमित छिड़काव और फॉगिंग की जा रही है। आशाएं नियमित रूप से ऐसे इलाकों में जाकर सर्वे कर रहीं हैं। कोई भी समस्या होने पर जल्द नजदीकी पीएचसी या सीएचसी पर जाकर परामर्श लें। समय पर हेल्थ कैंप भी लगाए जाते हैं।