कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व की कालागढ़ रेंज में आबादी में बाघ ने आठ महीने में दूसरी घटना को अंजाम दे दिया। आबादी क्षेत्र में बाघ को नियंत्रित करने के वन विभाग के दावे हाशिए पर नजर आते हैं।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में वन्यजीवों की सुरक्षा और आबादी में वन्यजीवों से आम नागरिकों की सुरक्षा में वन विभाग व प्रशासन का नजरिया सकारात्मक नहीं है। 31 जुलाई को केंद्रीय काॅलोनी में टीना (22) को उसके घर में ही बाघ ने उस समय अपना शिकार बना लिया था, जब वह रात्रि भोजन के बाद बर्तन धो रही थी। उसके बाद 30 मार्च को कालागढ़ में लकड़घाट क्षेत्र के अंतर्गत हाथीशाला के निकट मानव खोपड़ी के कंकाल के मिलने पर लोगों में एक बार फिर से बाघ की दहशत पैदा हो गई है।
संजय नगर निवासी चमनलाल गुप्ता के चाचा भारत सिंह को बाघ के खाने की आशंका पैदा हो गई है। आठ महीनों में बाघ के नियंत्रण के लिए गश्ती दलों की सतर्कता, ड्रोन से गश्त, पुलिस पेट्रोलिंग, सीसीटीवी कैमरा आदि सभी कुछ असफल नजर आते हैं। नई काॅलोनी, केन्द्रीय काॅलोनी, सुरक्षा बैरियर संख्या 02/06 से रामगंगा बांध व सैडिल बांध तक बाघ व गुलदार का विचरण हो रहा है।
- आवासों के ध्वस्तीकरण पैदा हुई समस्या
केंद्रीय काॅलोनी व नई काॅलोनी में खाली पड़े आवासों के ध्वस्तीकरण से वन्यजीव आबादी की ओर बढ़ रहे हैं। मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। वहीं जनपद बिजनौर की उत्तरी सीमा पर बसे इस्लामनगर पंचायत के ग्रामीण क्षेत्र भी वन्यजीवों के निशाने पर नजर आते हैं। यहां जीवन खतरे से बचा नहीं है।