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इंदिरा पार्क में ऑक्सीजन का भंडार बदहाल

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बिजनौर के इंदिरा पार्क में बदहाल पुरानी पंचवटी। - फोटो : BIJNOR
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बिजनौर। एक ओर जहां ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार मचा है। वहीं दूसरी ओर अब लोगों को प्राकृतिक ऑक्सीजन का महत्व समझ आने लगा है। ऐसे में त्रेता युग में वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने मां सीता व छोटे भाई लक्ष्मण के साथ जिस पंचवटी में स्वस्थ रहे थे, वह आज भी वरदान साबित हो सकती है। बिजनौर शहर के इंदिरा पार्क में एक नहीं बल्कि दो पंचवटी हैं। दुर्भाग्यवश पुरानी पंचवटी लोगों के लिए न खोलने से कबाड़ डालने का स्थान बन गई है। वहीं, नई पंचवटी भी देखरेख के अभाव में बदहाल होती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि डीएफओ ऑफिस और रेंजर ऑफिस इंदिरा पार्क में हैं।
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पंचवटी मतलब ऑक्सीजन का भंडार
पंचवटी में पीपल का पेड़ पूरब दिशा लगाया जाता है। इससे पीपल करीब 1800 किलोग्राम प्रतिघंटा की दर से ऑक्सीजन का उत्सर्जन करता है। वहीं, बरगद का पेड़ पश्चिम में लगाया जाता है। माना जाता है कि यह वृक्ष यहां वातानुकूलन का कार्य करता है। आंवला दक्षिण दिशा में, बेल उत्तर में तथा अशोक दक्षिण-पूर्व में लगाए जाते हैं। इन्हें स्वास्थ्यवर्द्धक माना जाता है। इनमें बीच की दूरी करीब 10 मीटर सही मानी जाती है।
वैज्ञानिक भी कर चुके दावा
सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) के वैज्ञानिकों ने कुछ साल पहले पंचवटी पर शोध किया था। इसमें पंचवटी में शामिल पांच वृक्षों पीपल, बरगद, आंवला, बेल तथा अशोक पर अलग-अलग शोध किया। इसमें सामने आया था कि पंचवटी के आसपास रहने से बीमारी कम होती हैं। इसके नीचे रहने या बैठने से मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। वहीं, प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है। प्रदेश में इसके तहत कुछ साल पहले जगह-जगह पंचवटी लगाई गई थी। इंदिरा पार्क में भी नई पंचवटी बनाई गई।
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सुधारेंगे पंचवटी की हालत : डीएफओ
डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन ने बताया कि इंदिरा पार्क में पंचवटी व अन्य पौधों की देखभाल कराई जा रही है। रेंजर कार्यालय के पीछे की पंचवटी को दिखवाया जाएगा। वहां सफाई कराकर उसे बेहतर कराया जाएगा।
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