बिजनौर में पिंजरे में फंसा गुलदार। फाइल फोटो।
बिजनौर। चार साल पहले तक 22 गांव में ही गुलदार का खौफ था। यह गांव भी रिजर्व फॉरेस्ट की सीमा से सटे हुए थे। गुलदार ने गन्ने के खेतों का रुख किया और अब इंसानों का शिकार शुरू कर दिया। आंकड़ों पर नजर डालें तो तीन साल में 33 इंसान गुलदार के हमलों में मारे गए और घायलों की संख्या 100 का आंकड़ा पार कर चुकी है। कमाल की बात यह है कि इतना सबकुछ होने के बावजूद जिले में माननीय इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हैं। कुछ नेताओं ने गुलदार की समस्या उठाने की शुरुआत की तो वह भी रस्म अदायगी बनकर रह गई। ऐसे में गुलदार जिले में बाढ़ से भी बढ़ी आपदा बन गया है।
वहीं, पिछले एक साल में जिले में गुलदार से जुड़ी दर्जनों वीडियो वायरल हुए। इनमें से कुछ ऐसी भी रही, जो वन विभाग की चिंता भी बढ़ा रही है। आमतौर पर गुलदार को अकेले ही देखा जाता रहा है। वहीं जिले में तीन से चार की संख्या में भी बड़े गुलदार दिख रहे हैं। यदि ऐसा ही बदलाव चलता रहा तो गुलदार झुंड में शिकार शुरू कर देंगे और समस्या और विकट हो जाएगी।
बचाव और सतर्कता ही उपाय है : उप प्रभागीय वनाधिकारी ज्ञान सिंह ने कहा कि इस समय जो गुलदार हैं, उनमें से अधिकांश गन्ने के खेतों में ही पैदा हुए हैं।
यह गन्ने के खेतों को अपना घर मानते हैं। इसके अलावा इनका व्यवहार भी बदला है। लोग जब खेतों पर जाएं तो हाका करें, अकेले न रहें और बचाव सतर्कता के नियमों का पालन करें। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को खेतों पर पर लेकर बिल्कुल न जाएं।