बिजनौर। अब लोग घर में ही अपनों से अपनी समस्या बताने से हिचकने लगे हैं। मानसिक समस्या को लेकर दोस्तों और परिजनों के बजाए एआई से सलाह मांग रहे हैं। मनकक्ष में काउंसलिंग कराने पहुंचे युवाओं से मनोचिकित्सक ने पूछताछ की तो इसका पता चला।
मेडिकल अस्पताल बिजनौर में रोज लगभग 80 लोग मानसिक रोग विशेषज्ञ व काउंसलर से परामर्श ले रहे हैं। चिकित्सकों ने बताया कि पहले जहां लोग अपनी समस्याएं परिवार या चिकित्सकों से साझा करते थे, वहीं अब अपनी समस्याएं एआई से साझा कर रहे हैं। मरीजों से जब इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि और किसी को बताने में एक डर रहता है कि वह क्या प्रतिक्रिया देगा। नाराजगी होने पर उसे पागल का ताना न मारने लगे।
चिकित्सकों ने बताया कि कुछ हद तक यह ठीक भी है, क्योंकि एआई बिना तर्क के कोई सलाह नहीं देता है। कई बार लोग बीमारी को अंधविश्वास के रूप में देखने लगते हैं। एआई ऐसी कोई सलाह नहीं देता व चिकित्सक या काउंसलर के परामर्श का सुझाव भी देता है।
तकनीक सहारा है, समाधान नहीं : डाॅ. नितिन
मेडिकल अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ ने बताया कि एआई का इस्तेमाल सिर्फ एक हद तक ही सुरक्षित है। इंसान को एआई कभी भी इंसान से बेहतर नहीं समझ सकता। भावनात्मक तसल्ली एआई से बात कर इंसान को नहीं मिल सकती। आत्मविश्वास रखते हुए अपनी समस्या को परिवार में या चिकित्सक से साझा करना चाहिए।
मानसिक बीमारियों के लक्षण
- सिर में दर्द होना, नींद में कमी होना
- उदास होना, ठीक से समझने या बोलने में परेशानी होना
- सामान्य चीजें समझाने में दिक्कत होना
- मानसिक बीमारियों से बचाव, नियमित रूप से व्यायाम करें
- अच्छी नींद लें, शाम को जल्दी सोएं और सुबह जल्दी उठें
- परिवार के साथ जुड़ें, परिवार के किसी सदस्य को अपनी समस्या बताएं