बिना एसडीएम के अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच नहीं कर सकेंगे अधिकारी
बिजनौर। डीएम उमेश मिश्रा ने पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी को निर्देशित किया कि नर्सिंग होम आदि की जांच के लिए संबंधित तहसील के एसडीएम को अनिवार्य रूप से साथ लेकर जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में कन्या भ्रूण चिह्निकरण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। कहा कि एक सप्ताह में कम से कम तीन अल्ट्रासाउंड केंद्रों का अनिवार्य रूप से निरीक्षण करें।
शनिवार को जिलाधिकारी उमेश मिश्रा कलक्ट्रेट सभागार में स्थित पीसीपीएनडीटी से संबंधित समिति की बैठक की लेकर अफसरों को निर्देशित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल बैठकों से ही संभव नहीं है, बल्कि जन सामान्य को लिंग अनुपात के संकट के प्रति जागरूक करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिए जिले में अल्ट्रासाउंड केंद्र और नवीनीकरण होने वाले मामलों में पूरी छानबीन करने के बाद ही उन्हें अनुमति प्रदान करें। साथ ही हर केंद्र पर कन्या भ्रूण हत्या से संबंधित कानूनी जानकारी पर आधारित स्पष्ट शब्दों में बोर्ड अथवा दीवार पर आईसी मेटीरियल लिखवाना और अल्ट्रासाउंड कक्ष में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना को अनिवार्य किया जाए, उसके बाद ही अल्ट्रासाउंड केंद्रों के नवीनीकरण आदि की अनुमति दी जाए। इस अवसर पर पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डा. एसके निगम, जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. प्रभा रानी, डा. बीआर त्यागी, सुधा राठी, जिला सूचना अधिकारी दिलीप कुमार गुुप्ता सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।