बिजनौर में गंगा हरीतिमा योजना में गंगा किनारे को हरियाली से भरने के लिए इस बार वन विभाग किसानों की सब्जी बोने की पद्धति को अपनाएगा। गंगा खादर में पौधरोपण करने के बजाए बीज लगाए जाएंगे। इससे गंगा किनारे हरियाली ज्यादा बढ़ेगी। अंकुरित होने वाली जगह पर पौधे के विकसित होने की संभावनाएं बहुत ज्यादा रहती हैं।
गंगा जिले के बड़े क्षेत्र से होकर गुजरती है। गंगा की सफाई के लिए जिले में बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार गंगा की सफाई पर पूरा जोर दे रही हैं। गंगा किनारे पर पौधरोपण के लिए भी अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार ने गंगा हरीतिमा योजना शुरू की है। बिजनौर वानिकी संभाग भी जिले में गंगा किनारे करीब दो हजार हेक्टेअर जमीन में हरित पट्टी तैयार करेगा। इसके लिए पौधरोपण अभियान के बजाए इस बार बीज बोए जाएंगे। किसान जैसे खेतों में सब्जी बोने के लिए छोटी मेढ़ तैयार करता है ऐसी ही मेढ़ गंगा किनारे तैयार की जाएंगी। इनमें पौधों के बीज आदि लगाए जाएंगे।
पौधे एक जगह से दूसरी जगह लगाने पर खराब हो जाते हैं। काफी पौधे मर भी जाते हैं। मगर, गंगा किनारे बीज से अंकुरित होने वाले पौधों को इस तरह की दिक्कत नहीं आएगी। इन पौधों को जीवन के लिए संघर्ष नहीं करना होगा। खास बात यह है कि गंगा किनारे औषधीय गुणों वाले पौधे लगाए जाएंगे। आंवला, अर्जुन, जामुन, पीपल, बरगद आदि के पौधे लगवाए जाएंगे।
इन पेड़ों का इस्तेमाल दवाई बनाने में होता है। गंगा किनारे पेड़ लगने से सफाई अभियान भी जोर पकड़ेेगा। इन पेड़ों की जड़ों से पानी छनकर साफ होता है। गंगा किनारे पक्षी आदि आने से प्राकृतिक वातावरण विकसित होगा। डीएफओ डा. एम सेम्मारन के मुताबिक गंगा हरीतिमा योजना में जिले का चयन हुआ है। गंगा किनारे दो लाख पौधे लगाने का पूरा प्लान तैयार है।