जिले के गांव मुकरपुरी में कई बार आए थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस
बिजनौर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का संबंध जनपद के कई लोगों से रहा। स्योहारा क्षेत्र के ग्राम मुकरपुरी में नेताजी के आने की सूचना पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने गांव में दबिश भी दी थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस वेश बदलने में माहिर थे। ग्राम मुकरपुरी निवासी रिक्खी सिंह के पुत्र ध्यान सिंह पढ़ाई के लिए जनपद बुलंदशहर के खुर्जा में रहते थे। उसी दौरान वह सुभाष चंद्र बोस के संपर्क में आए। नेताजी की प्रेरणा से ध्यान सिंह आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। इसके बाद सुभाषचंद्र बोस कई बार उनसे मिलने मुकरपुरी आए थे।
जनपद बिजनौर के इतिहास के जानकार हेमंत कुमार बताते हैं कि आजाद हिंद फौज बनाने के बाद नेताजी गांव-गांव घूमकर युवाओं को आजाद हिंद फौज में आने के लिए प्रेरित कर रहे थे। इसी क्रम में वह मुकरपुरी पहुंचे थे। ध्यान सिंह की पत्नी बलवंती देवी ने उन्हें खाना बना कर खिलाया था। ध्यान सिंह के पुत्र रक्षपाल सिंह चौहान बताते हैं कि उनके पिता नेताजी सुभाष चंद्र बोस से नजदीकी होने के कारण अंग्रेजी हुकूमत के निशाने पर रहे। जब सुभाष चंद्र बोस के आने की भनक स्थानीय प्रशासन को मिली, तब तत्कालीन जिलाधिकारी उनके घर आए थे। आंदोलन में भाग लेने पर कठोर दंड की धमकी भी दे गए थे। लेकिन ध्यान सिंह विचलित नहीं हुए और निरंतर स्वतंत्रता आंदोलन में जुड़े रहे।
ध्यान सिंह भी नेताजी की तरह जंगलों में रहते थे। उनके पुत्र रजनीश कुमार बताते हैं कि उनकी दादी बलवंती देवी उन्हें नेताजी के आने के बारे में बताती थीं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस तीन बार गांव मुकरपुरी आए। मुकरपुरी गांव रामगंगा नदी के किनारे बसा है। जब भी नेता जी मुकरपुरी आते थे, तब एक नाव रामगंगा नदी पर तैयार रहती थी, जिससे प्रशासन के आने पर सुरक्षित निकला जा सके। रजनीश कुमार के अनुसार सन 1993 में उनकी दादी बलवंती देवी का निधन हो गया था।