उधर इस आवाज के साथ पिंजरे में बंद सिंभा और सिंभी के बीच भी हलचल बढ़ गई थी। आवाज जहां सबसे नजदीक आई, वहीं पर पिंजरा खोल दिया गया। पिंजरा खुलते ही मां की आवाज के पीछे सिंभा और सिंभी दोनों शावकों ने दौड़ लगा दी। कुछ ही देर में वहां सन्नाटा छा गया। डीएफओ डॉ.अनिल पटेल ने बताया कि दोनों शावक अपनी मां के साथ चले गए हैं। यह राहत-बचाव ऑपरेशन सफल रहा, क्योंकि दोनों शवकों को पकड़ा भी किया गया और उनकी मां से भी मिला दिया गया।
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हिंसक हो सकती थी मादा गुलदार, बच गए क्षेत्रवासी
डीएफओ डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि गुलदार को यदि उनके शावक न मिलते तो वह उन्हें जंगल में तलाशती। ऐसे में उसके हिंसक होने की आशंका भी रहती है। अब दोनों शावकों के मिलने के बाद वह शांत हो गई और आगे जंगल में निकल गई। बच्चों को खोने के बाद वन्य जीवों के हिंसक होने की आशंका बन जाती है, इसलिए ऐसे शावकों को उनकी मां से मिलाने की पहली प्राथमिकता रहती है।