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नवरात्र में करिश्मा: कुएं में गिरे शावकों की बचाई जान, फिर मां से भी मिलाया, दिलचस्प है पूरी कहानी

Sun, 10 Apr 2022 01:07 AM IST
कपिल kapil रजनीश त्यागी, अमर उजाला, बिजनौर

सार

नवरात्र में माता रानी का करिश्मा देखने को मिला है। कुएं में गिरे तेंदुए के दो बच्चों को वन विभाग की टीम ने बचा लिया। इसके बाद अधिकारियों ने किसी तरह बच्चों को बचा लिया गया। इसके बाद दोनों को उनकी मां से भी मिलवा दिया गया।
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बिजनौर में कुएं में गिरे शावकों को बचाया। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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नवरात्रि में जहां मां की ममता हर ओर छायी हुई है, वहीं वन्य जीव भी इस ममता से अछूते नहीं है। शुक्रवार की शाम कुएं में गिरे दो गुलदार के शावक कुछ ही घंटों में अपने मां के पास पहुंच गए। वन अफसरों ने जब दोनों शावकों को राहत बचाव कार्य कर बचाया तो आसपास के खेतों से उनकी मां (गुलदार) के गुर्राने की आवाज आने लगी। इसके बाद वन अफसरों ने दोनों शावकों को उनकी मां से मिलाने का ऑपरेशन शुरू कर दिया। आवाज के नजदीक पहुंच जैसे ही पिंजरा खोला, तो दोनों शावकों ने अपनी उस आवाज की ओर दौड़ लगा दी। वन अफसरों ने दोनों शावकों को सिंभा और सिंभी के नाम से पुकारना भी शुरू कर दिया था। इसके बाद दोनों शावक अपनी मां के साथ जंगल में आगे निकल गए। 

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शुक्रवार की दोपहर नजीबाबाद रेंज के अंतर्गत ग्राम मेमन सादात में एक सूखे कुएं में गुलदार के दो शावक गिर गए थे। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची वन अफसरों की टीम ने राहत-बचाव कार्य कर दोनों को बाहर निकाल लिया। इस पूरे राहत-बचाव ऑपरेशन में दोनों शावकों को इंसानी गंध से दूर रखने का प्रयास किया गया और उन्हें एक पिंजरे में बंद कर दिया। दोनों शावकों की उम्र का आकलन तीन से चार माह के बीच किया गया। ऐसे में इन्हें जंगल में अकेला छोड़ना भी उचित नहीं था। 

उधर, ग्रामीण भी इन्हें यहां से भेजने की जिद पर अड़े थे। इस दौरान वन अफसरों ने एक शावक को सिंभा और दूसरे को सिंभी कहकर पुकारना शुरू कर दिया। उम्मीद यही थी कि इन्हें किसी चिड़ियाघर भेजा जाएगा। शाम ढ़लते ही जब अंधेरा हुआ तो वन अफसरों को आसपास के खेतों से गुलदार के गुर्राने की आवाज सुनाई देने लगी। वन अफसरों ने समझने में देर नहीं लगाई कि सिंभा और सिंभी की मां उन्हें जंगल में तलाश रही है। इसके बाद कुछ दूरी तक आवाज का पीछा किया गया। 
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उधर इस आवाज के साथ पिंजरे में बंद सिंभा और सिंभी के बीच भी हलचल बढ़ गई थी। आवाज जहां सबसे नजदीक आई, वहीं पर पिंजरा खोल दिया गया। पिंजरा खुलते ही मां की आवाज के पीछे सिंभा और सिंभी दोनों शावकों ने दौड़ लगा दी। कुछ ही देर में वहां सन्नाटा छा गया। डीएफओ डॉ.अनिल पटेल ने बताया कि दोनों शावक अपनी मां के साथ चले गए हैं। यह राहत-बचाव ऑपरेशन सफल रहा, क्योंकि दोनों शवकों को पकड़ा भी किया गया और उनकी मां से भी मिला दिया गया। 

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हिंसक हो सकती थी मादा गुलदार, बच गए क्षेत्रवासी
डीएफओ डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि गुलदार को यदि उनके शावक न मिलते तो वह उन्हें जंगल में तलाशती। ऐसे में उसके हिंसक होने की आशंका भी रहती है। अब दोनों शावकों के मिलने के बाद वह शांत हो गई और आगे जंगल में निकल गई। बच्चों को खोने के बाद वन्य जीवों के हिंसक होने की आशंका बन जाती है, इसलिए ऐसे शावकों को उनकी मां से मिलाने की पहली प्राथमिकता रहती है।
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