20 साल बंद है नगीना सहकारी कताई मिल
नगीना। नगीना क्षेत्र के युवाओं व व्यापारियों को लगभग 23 साल तक प्रत्यक्ष व परोक्ष रोजगार उपलब्ध कराने वाली सहकारी कताई मिल 20 साल से बंद पड़ी है। नगीना-कोतवाली मार्ग पर स्थित नगीना सहकारी कताई मिल का शिलान्यास 1978 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने किया था। तत्कालीन कैबिनेट मंत्री अजीजुर्रहमान के प्रयासों से मिल की स्थापना की गई थी।
रोजगार की दृष्टि से पिछड़े नगीना क्षेत्र में सहकारी क्षेत्र की कताई मिल शुरू होने से दो हजार बेरोजगार युवकों और युवतियों को रोजगार मिला था। श्रमिकों की यूनियनबाजी, प्रबंधकों व श्रमिकों की आपसी खींचातानी के कारण मिल को भारी घाटा होने लगा। सरकार की सहमति के बाद 22 जनवरी 2001 को नगीना सहकारी मिल में तालाबंदी कर इसे बंद कर दिया गया। इसमें काम करने वाले दो हजार मजदूरों की नौकरी चली गई। परिवार पालने के लिए उन्हें अलग-अलग स्थानों पर मजदूरी करने को विवश होना पड़ा। मदनपाल (श्रम सहायक) का कहना है कि कताई मिल बंद होने के बाद यहां काम करने वाले करीब एक हजार श्रमिकों का करीब तीन करोड़ रुपया बकाया चल रहा है। इसके लिए कई बार शासन को पत्र भी लिखा जा चुका है। मिल में फोरमैन का कार्य कर चुके चंद्र गोपाल का कहना है कि उनका भी मिल पर एक लाख रुपये से अधिक बकाया चल रहा है।
मिल की जगह स्थापित हो अन्य उद्योग
व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष अब्दुल कय्यूम राईन का कहना है कि बंद कताई मिल की जगह पर किसी उद्योग की स्थापना होनी चाहिए। पूर्व मंत्री व स्थानीय विधायक मनोज पारस का कहना है कि समाजवादी पार्टी की सरकार ने प्रदेश की सभी बंद मिलों को प्राइवेट में देकर चलाने का कैबिनेट में प्रस्ताव पास कराया था। लेकिन उस समय कोई प्राइवेट कंपनी मिल को चलाने के लिए तैयार नहीं हुई थी। बाद में सपा सरकार जाने के बाद प्रदेश में बनी भाजपा की सरकार के वर्तमान समय में भी वह कई बार विधानसभा में मिल को चलाने की मांग कर चुके हैं।