जिले में दो गुना हुआ सरसों का रकबा
बिजनौर। जिले के किसानों ने पहली बार मुनाफे की खेती की ओर कदम बढ़ाया है। सरसों पर छाई महंगाई को देखते हुए इस बार सरसों की बंपर बुवाई हुई हैं। सरसों का रकबा लगभग दोगुना हो गया है। सरकारी बीज की दुकानों से सरसों का पूूरा बीज बिक गया है, जबकि गेहूं का बीज कम बिक रहा है। किसान बेचने के अलावा घर के इस्तेमाल के लिए भी सरसों बो रहे हैं।
जिले के किसान गन्ना, गेहूं और धान से आगे की खेती के बारे में नहीं सोचते हैं। इन फसलों को छोड़कर किसी भी बिकने वाली फसल का रकबा दस हजार हेक्टेयर से अधिक नहीं रहता है। कोरोना काल में आलू महंगा हुआ, लेकिन इसके बाद भी आलू का रकबा नहीं बढ़ा। हाल ही में सरसों के तेल के साथ रसोई गैस के दाम चढ़े हुए थे। दाम इतने चढ़े हुए थे कि ये विपक्ष का मुद्दा बन गया। सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम तो कम कर दिए, लेकिन सरसों के दाम बाजार पर ही निर्भर हैं। सरसों के महंगा होने का फायदा पहली बार किसान उठाते दिख रहे हैं। जिले में इस बार किसानों ने नवंबर में करीब नौ हजार हेक्टेयर जमीन में सरसों बोई है, जबकि सरसों का रकबा आमतौर पर पांच हजार हेक्टेयर तक भी नहीं रहता है। सरसों की वजह से गेहूं की बुवाई भी इस बार प्रभावित हो रही है।
दामों में हुआ इजाफा
बाजार में काली सरसों के दाम साढे़ सात हजार रुपये और पीली सरसों के दाम नौ हजार रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे हैं। सरसों के इतने दाम कभी नहीं हुए। पहले काली सरसों के दाम चार हजार और पीली सरसों के दाम चार हजार रुपये प्रति क्विंटल तक रहते थे। जिले में सरसों का 42.48 क्विंटल बीज आया था जो सारा बिक गया। इसके अलावा किसानों को दो दो किलो की 3600 मिनी किट में भी सरसों का बीज दिया गया है। दो किलो बीज पांच बीघा तक जमीन में बोया जा सकता है।
बाजार की संभावना देखकर बोएं फसल
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र के अनुसार किसानों को बाजार की संभावना को देखकर फसल बोनी चाहिए। खुद के प्रयोग के लिए भी फसल उत्पादन करना चाहिए।
साल रकबा
2015-16 2349
2017-18 4593
2018-19 4070
2019-20 4519
2020-21 4745
2021-22 8933 अब तक
नोट : सरसों का रकबा हेक्टेयर में है।