दिल्ली में दम घुटने से हुई मुशर्रफ की मौत
बिजनौर। दिल्ली के पुरानी मंडी इलाके में पांच मंजिला इमारत में आग लगने के दौरान वहां से मुशर्रफ अली की अपने कमरे में दम घुटने से मौत हुई थी। मुशर्रफ का शरीर कही से भी जला नही मिला है। सोमवार को चार बजे दिल्ली में शव का पोस्टमार्टम होने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है।
नगीना देहात थाने के गांव टांडा माईदास वाला निवासी 32 साल का मुशर्रफ अली अनाज मंडी के पास पांच मंजिला इमारत में बैग बनाने की फैक्ट्री में बैग बनता था। आग लगने के दौरान वह भी इमारत में साथियो के साथ फंस गया था। उसकी भी मौत हो गई। मौत के आगोश में समाने से पहले मुशर्रफ ने गांव के ही अपने साथी शोभित अग्रवाल उर्फ मोनू को मोबाबल पर कॉल करके सामने आ रही मौत के मंजर की दास्तां बताई थी। कहा था कि चारों ओर धुआं ही धुआं है। उसे सांस लेने में दिक्कत आ रही है। उसका बचना मुश्किल है। शोभित से मुशर्रफ ने बच्चो का ख्याल रखने को कहने के साथ बच्चो की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद मुशर्रफ ने दम तोड़ दिया। फिर उसकी मोबाइल पर बात नही हुई। मुशर्रफ की हादसे में मौत की सूचना पर पूरा गांव शोक मे डूब गया। ग्राम प्रधान फुरकान सलीम समेत गांव के तमाम लोग दिल्ली की ओर दौड़ पडे़। मुशर्रफ के साथ कमरे में कितने साथी ओर थे। यह पता नही चल पाया। मुशर्रफ का शव उसके कमरे से मिला है। ग्राम प्रधान के मुताबिक मुशर्रफ की दम घुटने से ही मौत हुई है। उसका शरीर कहीं से भी नहीं जला। पूरा शरीर सही सलामत था। मुशर्रफ के शव का दिल्ली में सोमवार को शाम चार बजे पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिजन शव लेकर गांव के लिए रवाना हो गए। देर रात तक उनके गांव पहुंचने की उम्मीद है। मुशर्रफ की मौत से गांव में मातम पसरा है। हर किसी को मुशर्रफ की हादसे में हुई मौत का बेहद दुख है। बिजनौर के साजिद (तोफीर) की भी इस हादसे में मौत होने की बात कही जा रही है। साजिद कहां का रहने वाला है इसका कोई पता नहीं चल पाया। दिन भर पुलिस व अन्य लोग साजिद का पता निकालते रहे पर उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।