दोनों भाइयों ने चर्च का निर्माण पूरा होने के बाद इसाई धर्म अपना लिया था। ताजपुर रियासत के इंद्रजीत सिंह बताते हैं कि चर्च निर्माण में कितनी रकम खर्च हुई, इसका सही आंकड़ा तो उनके पास नहीं है लेकिन उस समय लाखों रुपये इस पर खर्च हुए होंगे।
वह बताते हैं कि चर्च में स्थापित बेदी के पीछे दीवारों तथा छत पर 40 किलो सोना जड़वाया गया था। चर्च की बेदी का निर्माण फ्लोरेंस निवासी जोजप्पे कतानी चिंती ने किया था। इसमें संगमरमर का प्रयोग हुआ।
12 एकड़ भूमि पर बने चर्च में लगवाने वाला पत्थर भी इटली से मंगाया गया और शीशे बेल्जियम से आए थे। इटली के कारीगरों ने चर्च की तामीर की। आज भी ताजपुर के सिक्रेट हार्ट चर्च को एशिया के बड़े और खूबसूरत चर्च में गिना जाता है।
चर्च में है शिवनाथ सिंह और उनकी पत्नी की कब्र
राजा श्याम सिंह रिख के छोटे भाई शिवनाथ सिंह को उनकी इच्छा के अनुसार चर्च में ही दफनाया गया था। प्रार्थना सभा कक्ष के एक कोने में उनकी कब्र है। चर्च को दोनों राजा-रानियों के प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है।