‘क्षमा भाव को व्यवहारिक रूप में ढालें’
नजीबाबाद। दशलक्षण पर्व के समापन पर श्रद्धालुओं ने तीर्थंकर आदिनाथ के अभिषेक के साथ क्षमावाणी पर्व मनाया। एक-दूसरे से क्षमा याचना के साथ अहिंसा परमोधर्मा: को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।
श्री दिगंबर जैन पंचायती और सरजायती मंदिरों में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का अभिषेक करते हुए क्षमावाणी पर्व पर सभी को क्षमादान का संकल्प लिया। क्षमावाणी पर्व पर चर्चा करते हुए अजय जैन, जितेंद्र जैन और जिनेश्वर दास जैन ने कहा की क्रोध पर नियंत्रण करना क्षमा है लेकिन जब यह आत्मा का धर्म बन जाता है तो उत्तम क्षमा कहलाता है। जैन विद्वानों ने क्षमा भाव को जीवन में व्यवहारिक रूप में स्वीकार करने की सलाह दी।
दशलक्षण पर्व के समापन पर अभिषेक, पूजा-प्रक्षाल आदि धार्मिक कार्यक्रमों में पारसनाथ जैन, संतोष जैन, दीपक जैन, नीरज जैन, संजय जैन, श्रेयांश जैन, मनीष जैन, राहुल जैन, अनुभव जैन, नवकार जैन, आशीष जैन, रुक्मिणी जैन, पुनीत जैन, अक्षत जैन, समीक्षा जैन, यश जैन, छवि जैन सहित जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।