मिशन कायाकल्प की रफ्तार पड़ी धीमी
बिजनौर। मिशन कायाकल्प अफसरों के रुचि नहीं लेने से स्कूलों की सूरत नहीं बदली जा सकी है। स्कूलों में काम आधे अधूरे पड़े हैं। शिक्षकों ने स्कूलों की रंगाई पुताई तो करा ली लेकिन पंचायत राज विभाग की ओर से होने वाले कार्य जस के तस पड़े हुए हैं। इससे योजना को पलीता लग रहा है। अधिकारियों ने जल्दी ही कार्य पूरे करने के निर्देश दिए हैं।
शासन ने परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों की सूरत बदलने के लिए मिशन कायाकल्प शुरू किया था। राज्य परियोजना निदेशक ने दिसंबर 2019 में परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालय में आवश्यक कार्य पंचायत राज विभाग से कराने के दिशा निर्देश दिए थे, जिसमें स्कूलों की चाहरदिवारी, फर्नीचर शौचालय का निर्माण पेयजल व्यवस्था, टाइल्स, लघु मरम्मत आदि कार्य होने थे। बीएसए महेश चंद्र ने सभी विकास क्षेत्रों के खंड शिक्षा अधिकारियों से स्कूलों में होने वाले कार्यों की सूची भी मांगी थी। विकास क्षेत्र से आई सूची को भी पंचायत राज विभाग को दिया गया। अधिकांश स्कूलों में अभी भी बहुत सारे काम होने शेष हैं। जबकि मिशन कायाकल्प के तहत सारे कार्य मार्च तक पूरे होने थे, लेकिन पंचायत स्तर पर ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम प्रधानों के भी रुचि नहीं लेने के कारण परिषदीय स्कूलों में अधिकांश कार्य लंबित पड़े हुए हैं।
इनमें पेयजल व्यवस्था, शौचालय स्वच्छता अभियान, स्कूलों में टाइल्स लगवाना, मरम्मत के कार्य व काफी स्कूल चारदीवारी निर्माण से भी वंचित हैं। कार्य पूरे नहीं होने से परियोजना के कार्यों को पलीता भी लग रहा है। हालांकि शिक्षा विभाग मिशन कायाकल्प में प्रदेश में जिले का चौथा नंबर आने का दावा करता रहा है, परंतु बार-बार निर्देश मिलने के बाद भी कार्य पूरे नहीं हो सके। बुधवार को डीएम रमाकांत पांडे की अध्यक्षता में जिले के एडीओ पंचायत, शिक्षा विभाग के अफसरों की बैठक लेकर भी कार्य जल्द ही पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर शिक्षा विभाग की ओर से भी बीएसए महेश चंद्र जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से मिशन कायाकल्प में अब तक कितने कार्य हुए हैं और कितने कार्य से शेष है, इसकी जानकारी मांगी है।