केन क्रेशर का शुभारंभ करते भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत
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बिजनौर में शासन ने मिनी केन क्रेशर को खांडसारी नीति के अंतर्गत स्थापित करने को हरी झंडी दे दी है। इस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। मिनी केन क्रेशर लगाने को मंजूरी मिलने से किसानों को लाभ होगा। चीनी मिलों पर से किसानों की निर्भरता कम होगी। किसान बहुत कम जमीन व पूंजी में भी मिनी केन क्रेशर चला सकते हैं। जिले के रहने वाले शूरवीर सिंह लंबे समय से मिनी केन क्रेशर को खांडसारी नीति के अंतर्गत मंजूरी दिलाने के लिए प्रयासरत थे।
जिले में किसानों का मोह गन्ने की फसल से हट नहीं रहा है। किसान हर साल गन्ने के रकबे में बढ़ोतरी करते हैं लेकिन चीनी मिलों की पेराई क्षमता में कोई वृद्धि नहीं होती है। ऐसे में चीनी मिल के देरी से चलने या कोई टूट फूट होने पर मिल संचालन प्रभावित होने से किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है। हालांकि कोई परेशानी होने पर किसान अपना गन्ना पावर कोल्हू में बेचते थे, लेकिन वहां गन्ने का दाम व्यापारी की मर्जी पर निर्भर रहता है। बहुत कम जमीन और कम पूंजी से लगने वाले मिनी केन क्रेशर किसान खुद लगाकर इस समस्या से निजात पा सकते हैं, लेकिन खांडसारी नीति में मिनी केन क्रेशर को शामिल नहीं किया गया था। अगर कोई किसान मिनी केन क्रेशर लगा लेता था तो चीनी मिल वाले विरोध करके उसे बंद करा देते थे। जिले के किसान गांव गंगदासपुर निवासी शूरवीर सिंह मिनी केन क्रेशर को खांडसारी नीति में शामिल कराने के लिए कई साल से प्रयास कर रहे थे। उनके ये प्रयास अब जाकर रंग लाए हैं। प्रदेश सरकार ने मिनी केन क्रेशर को खांडसारी नीति में शामिल कर लिया है। किसान जागृति मंच के जिला संयोजक शूरवीर सिंह के अनुसार मिनी केन क्रेशर को खांडसारी नीति में शामिल करना अच्छा कदम है। इससे किसानों को फायदा होगा।
निकलता है ज्यादा माल
पावर कोल्हू के मुकाबले मिनी केन क्रेशर में गन्ने का रस अधिक निकलता है। पावर कोल्हू में एक क्विंटल गन्ने में तीन किलो रस कम निकलता है। मिनी केन क्रेशर की पेराई में गन्ने का सारा रस निकाल लिया जाता है। खोई में रस नहीं बचता है। तीन किलो रस से तीन किलो गुड़ बनाया जा सकता है। गुड़ के दाम 25 रुपये प्रति किलो भी हों तो 75 रुपये का गुड़ प्रति क्विंटल पर अधिक बनता है।
कई राज्यों में चलते हैं मिनी केन क्रेशर
महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात आदि राज्यों में केन क्रेशर पहले से ही चल रहे हैं। खांडसारी नीति में इन्हें शामिल किया गया है। किसान चाहें तो एक ग्राम पंचायत में मिलकर मिनी केन क्रेशर चलाकर गन्ने की फसल की पेराई कर सकते हैं।
कीमत और लागत आधी
मिनी केन क्रेशर पावर कोल्हू से 66 प्रतिशत हल्का होता है। पावर कोल्हू पर एक घंटे में 15 क्विंटल जबकि मिनी केन क्रेशर एक घंटे में दस क्विंटल गन्ना तक पेर सकता है। मिनी केन क्रेशर की मशीन की लागत बहुत कम होती है। यह कीमत में भी पावर कोल्हू से आधा होता है। मशीन का वजन कम होने के कारण ईंधन की खपत भी आधी होती है