बिजनौर। पहली बार करवाचौथ मनाने को लेकर सुहागिनों में खासा उत्साह है। वहीं, पुरानी महिलाएं भी रीति रिवाज के साथ अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करेंगी। महिलाओं का कहना है कि अपने मांग के सिंदूर की सलामती के लिए करवाचौथ व्रत धार्मिक दृष्टि से जरूरी है। पौराणिक कथा के अनुसार देवताओं और दानवों के बीच युद्ध चल रहा था। युद्ध में देवताओं की रक्षा के लिए उनकी पत्नियों ने व्रत रखा। तभी से यह करवाचौथ व्रत की शुरूआत हुई।
पति की लंबी उम्र के लिए पहली बार रखेंगी व्रत : इशिता
चाहशीरी निवासी इशिता भटनागर ने बताया कि करवाचौथ का व्रत रखने को लेकर काफी उत्साहित है। पहली बार अपने पति की लंबी उम्र की दुआ के लिए रीति रिवाज के साथ व्रत रखेगी। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही चांद की रोशनी में पति का दीदार करेगी।
त्योहार पर हावी हो रहा बाजारवाद: अर्चना वर्मा
बिजनौर के शिव चौक निवासी अर्चना वर्मा का कहना है कि एक दशक से करवाचौथ व्रत रखने में टीवी का असर दिखाई दे रहा है। बाजारवाद त्योहार पर हावी हो रहा है। पहले साधारण रूप से विधि विधान से पूजा अर्चना कर व्रत रखा जाता था।
विधि विधान से रखेगी करवाचौथ व्रत: शिवानी
जहांनाबाद खोबड़ा निवासी शिवानी ने कहा कि परिवार के बुजुर्ग महिलाओं के सानिध्य में करवाचौथ का व्रत रखेगी। शादी के बाद पहली बार करवाचौथ पर्व मना रही है। विधि विधान से पूजा अर्चना कर अपने सुहाग की लंबी आयु की कामना करेगी।
पति की सलामती में है उसकी खुशी: सृष्टि राणा
सालमाबाद निवासी सृष्टि राणा का कहना है कि करवाचौथ व्रत पति की लंबी उम्र के लिए है। शादी के बाद हर साल व्रत रखती है। रीति रिवाज के हिसाब से ही चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही अन्न, जल ग्रहण करेगी। उसकी खुशी उसके पति की सलामती में है।
इशिता भटनागर। (पहली करवाचौथ। )
इशिता भटनागर। (पहली करवाचौथ। )